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    Donald Trump Tariffs Affect: कानपुर से अमेरिका माल भेजना बंद, कंटेनर की मांग घटी तो कम हुआ किराया

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 01:27 PM (IST)

    Trump Tariffs Affect डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का असर दिखने लगा है। अमेरिकी रूट पर कंटेनर की मांग घट गई है। कानपुर से अमेरिका माल भेजना पूरी तरह से बंद हो गया है। वहीं कंटेनर कम भेजे जाने से इस रूट पर किराया भी कम हो गया। कानपुर से हर साल करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का माल अमेरिका को निर्यात होता था।

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    अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ का असर कानपुर में दिखने लगा।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। Trump Tariffs Affect: ट्रंप टैरिफ लागू होने के बाद कानपुर से अमेरिका के लिए माल भेजना बंद हो गया है। इसके चलते इस रूट पर कंटेनरों की मांग में 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसका असर कंटेनरों के भाड़े पर पड़ा है। पहले अमेरिका और उसके पड़ोसी देशों को भेजे जाने वाले कंटेनरों का भाड़ा 2,500 डालर प्रति कंटेनर था, जो अब घटकर 2,200 डालर हो गया है। हालांकि, पूर्वी तट की तुलना में पश्चिमी तट के देशों तक पहुंचने में अधिक समय लगता है, जिससे वहां की कीमतें कुछ अधिक होती हैं। भाड़े में कमी से क्रेता और विक्रेता दोनों को पहले से तय शर्तों के अनुसार लाभ हो रहा है।

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    कानपुर से हर साल करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का माल निर्यात होता था। अमेरिका और उसके पड़ोसी देशों में हर माह करीब 50 कंटेनर भेजे जाते थे। अब अब ट्रंप टैरिफ के बाद यह आंकड़ा घटकर 30 कंटेनर रह गया है। शिपिंग लाइन के पास इस रूट पर कंटेनरों की अधिकता और माल की कमी के कारण भाड़ा कम हुआ है।

    अमेरिका के पड़ोसी देशों में कनाडा, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, गुआना, इक्वाडोर, परागुआ, पेरू, सूरीना, उरुगवे, वेनेजुएला, जमैका, क्यूबा आदि शामिल हैं, जहां भारत का काफी माल जाता है। इसके पूर्वी तट वाले देशों में जहाज 35 दिन में पहुंच जाते हैं लेकिन पश्चिमी तट के देशों तक पहुंचने के लिए उन्हें पूरे महाद्वीप का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में वहां तक पहुंचने में सामान्य तौर पर 55 दिन लगते हैं। यात्रा के दिनों में वृद्धि के कारण ईंधन की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे भाड़ा भी प्रभावित होता है।

    निर्यात के दौरान, क्रेता और विक्रेता माल का आर्डर फाइनल करते समय तय कर लेते हैं कि भाड़ा कौन चुकाएगा। यदि विक्रेता भाड़ा चुकाता है, तो वह माल की कीमत में भाड़ा भी जोड़ता है। इस स्थिति में विक्रेता को लाभ होता है, जबकि यदि खरीदार भाड़ा चुका रहा है, तो भाड़े में कमी के कारण उसे लाभ होता है।

    शहर में अभी श्रमिकों को लेकर कोई समस्या नहीं

    ट्रंप के टैरिफ को लेकर अभी शहर के उद्योगों में श्रमिकों को लेकर कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आई है। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह समस्या आ रही है कि वहां श्रमिकों की संख्या कम की जा रही है। निर्यात कारोबार को करीब से जानने वालों का कहना है कि जिन जिलों का निर्यात पूरी तरह अमेरिका पर केंद्रित है, वहां असर पड़ रहा है। कानपुर से करीब सौ देशों को निर्यात होता है। इसके अलावा पिछले वित्तीय वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपये का जो निर्यात हुआ था, उसमें ढाई हजार करोड़ रुपये का हिस्सा अमेरिका का था। फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक यहां श्रमिकों की कोई समस्या नहीं है। निर्यातक तमाम दूसरे देशों से संपर्क कर अपने उत्पाद वहां निर्यात करने के प्रयास कर रहे हैं।

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    ट्रंप के टैरिफ की वजह से कंटेनरों की मांग में कमी आई है। इससे भाड़ा घट रहा है, क्योंकि इस समय अतिरिक्त कंटेनर उपलब्ध हैं। मांग में कमी करीब 40 प्रतिशत तक है।

    -विनोद मेहरोत्रा, प्रबंध निदेशक, बालाजी शिप कार्गो लिमिटेड।

    कंटेनर भाड़ा में कमी आने से अमेरिकी रूट पर माल भेजने व पाने वाले दोनों ही कारोबारियों को फायदा है। निर्यात के मामले में यह पहले ही तय हो जाता है कि भाड़ा कौन चुकाएगा।

    -आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आइआइए।

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