Trump Tariff: ट्रंप के टैरिफ से कानपुर के निर्यात को बड़ा झटका, चर्म उत्पाद सबसे ज्यादा होगा प्रभावित
ट्रंप के टैरिफ ने कानपुर के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है जिससे 2500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। शहर से अमेरिका को होने वाले 25% निर्यात पर असर पड़ेगा। निर्यातक अब नए बाजारों की तलाश में हैं और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे इस टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकें।

जागरण संवाददाता, कानपुर। ट्रंप का टैरिफ कानपुर के 2,500 करोड़ रुपये के निर्यात को झटका देगा। शहर से इस समय 10 हजार करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात होता है। इसमें से करीब 25 प्रतिशत सामान अमेरिका जाता है। निर्यातकों का कहना है कि इसका प्रभाव अच्छा नहीं होगा। उन्हें जल्दी ही नए बाजार तलाशने होंगे, इसके साथ ही जिस माल का एक अगस्त के बाद शिपमेंट होना है, उनके होल्ड होने के भी आसार नजर आ रहे हैं।
इस वर्ष की शुरुआत में जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में राष्ट्रपति पद को संभाला था, उस समय से ही पूरी दुनिया के अलग-अग देशों में अलग-अलग टैरिफ लगाने की बात उन्होंने कही थी। अब उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। वहीं वियतनाम, इंडोनेशिया, यूरोपियन यूनियन, जापान और यूके के लिए टैरिफ भारत से कम है। इन हालात से निर्यातक बुरी तरह चिंतित हैं।
निर्यात की दृष्टि से देखा जाए तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है। कानपुर से ढाई हजार करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात अमेरिका होता है। इसमें से एक हजार करोड़ रुपये करीब तो चर्म उत्पादों से ही हैं। इसमें चमड़े के बैग, जूते, बेल्ट, चमड़े के जैकेट, पर्स आदि शामिल हैं।
चर्म निर्यातक यादवेन्द्र सचान के मुताबिक इसका असर उन इकाइयों पर ज्यादा पड़ेगा जो श्रमिक आधारित उद्योग हैं। निर्यातक आर्डर पर माल बनाते हैं। इन उद्योगों के पास काम कम हुआ तो वे श्रमिकों की संख्या कम कर देंगे। वहीं जो इकाइयां पूरी तरह मैकेनिकल होती हैं, वहां काम नहीं होता तो मशीन बंद कर दी जाती है।
केमिकल कारोबारी आरके सफ्फड़ के मुताबिक इसका प्रभाव अच्छा नहीं होगा। इस टैरिफ से लड़ने के लिए केंद्र सरकार को सभी निर्यातकों को सब्सिडी देनी चाहिए ताकि वे टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकें।
सुनील वैश्य।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य के मुताबिक अमेरिका में कानपुर से सबसे ज्यादा माल जाता है। अगर दूसरे देशों का टैरिफ कम है तो वहां का माल हमारे माल की जगह ले लेगा। यह काफी खराब स्थिति है। दूसरी ओर यूके के साथ जो शुल्क मुक्त व्यापार पर हस्ताक्षर हुए हैं, उसका प्रभाव छह माह में दिखेगा।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक इससे चमड़ा, कपड़ा, मशीनरी, इंजीनियरिंग, आर्गेनिक और गैर आर्गेनिक केमिकल के निर्यात को झटका लगेगा। वियतनाम, इंडोनेशिया, यूरोपियन यूनियन, जापान और यूके का टैरिफ भारत से कम है। इन देशों के उत्पाद भारत को प्रतिस्पर्धा देंगे।
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