ट्रंप का टैरिफ; कानपुर में अमेरिका के आधे आर्डर रुके, अब फ्री ट्रेड देशों पर भरोसा
ट्रंप के टैरिफ को लेकर कानपुर के कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। उनके आर्डर तक रुक गए हैं। अमेरिका में जाने वाले आधे आर्डर रुके चुके हैं। गुरुवार को 25 प्रतिशत का पहला टैरिफ लागू होते ही इसका प्रभाव दिखना शुरू हुआ। अमेरिकी आयातक यह भी नहीं बता रहे कि रुका माल दोबारा कब मंगाएंगे।

जागरण संवाददाता, कानपुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ गुरुवार से लागू होते ही आधे से ज्यादा आर्डर होल्ड हो गए हैं। अमेरिकी आयातक यह भी नहीं बता रहे हैं कि अब ये आर्डर वे दोबारा कब मंगाएंगे। अभी यह टैरिफ 25 प्रतिशत है, अतिरिक्त टैरिफ लागू होते ही यह 50 प्रतिशत हो जाएगा। निर्यात से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि अब शुल्क मुक्त व्यापार वाले देशों का भरोसा है ताकि उन देशों में तेजी से निर्यात बढ़ाया जा सके। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात जो बढ़ता हुआ दिख रहा था, अगले कुछ माह में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दिखनी शुरू हो जाएगी।
अमेरिका में कानपुर से हर माह औसतन 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का माल निर्यात होता है। कानपुर के 10,400 करोड़ रुपये के निर्यात में पिछले वित्तीय वर्ष में ढाई हजार करोड़ रुपये का निर्यात अमेरिका को हुआ था। इसमें से एक हजार करोड़ रुपये चर्म उत्पादों का निर्यात था। अब जैसे-जैसे समय बढ़ेगा, निर्यात का यह आंकड़ा घटता जाएगा। कानपुर के साथ एक अच्छी बात यह है कि जितना निर्यात अमेरिका को होता है, उतना ही यूरोपीय देशों में निर्यात होता है। इन देशों में निर्यात को अब बढ़ाने की जरूरत है।
पूरे यूपी के परिदृश्य में बात करें तो पिछले वित्तीय वर्ष में यहां से अमेरिका में 35,545 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था। यह यूपी के कुल निर्यात का 19 प्रतिशत था। पिछले कुछ समय में नीदरलैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ी है। इन पर और फोकस करना होगा। हालांकि यूएई, वियतनाम और मलेशिया में मांग घटी है।
कारोबारियों के मुताबिक इस समय शुल्क मुक्त देशों से व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत है। ऐसे पचास से ज्यादा देश हैं। इनमें यूके, जापान, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, यूएई, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, चिली, मारीशस, सिंगापुर आदि देश हैं। इसके साथ ही उन देशों को चुना जाना चाहिए जहां अमेरिका ने कम टैरिफ लगाया है, ताकि अपने कच्चे माल को वहां भेजकर वहां निर्माण कर माल अमेरिका भेजा जा सके।
माल अमेरिका भेजने पर 50 प्रतिशत टैरिफ के अलावा जो पहले से शुल्क लग रहा है, वह भी जोड़ा जाएगा। इससे 55 प्रतिशत से लेकर 60 प्रतिशत तक शुल्क चुकाना होगा। इसकी वजह से कारोबारियों के जो पुराने क्लाइंट हैं, उनके छूटने का खतरा बन रहा है।
- आलोक श्रीवास्तव, कानपुर चैप्टर के सहायक निदेशक, फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन।
कानपुर से सबसे ज्यादा चर्म उत्पाद और कपड़े अमेरिका जाते हैं। इन दोनों में ही केमिकल का इस्तेमाल होता है। अब अगर यहां से अमेरिका के आर्डर रुकेंगे तो केमिकल का उपयोग भी रुकने लगेगा। इसी आशंका में कारोबारियों में मायूसी छायी हुई है।
- आरके सफ्फर, महामंत्री, यूपी डाइज एंड केमिकल मर्चेंट्स एसोसिएशन।
रेडीमेड कपड़ों के निर्यात पर प्रभाव पड़ने की आशंका लग रही है। जल्द ही कोई और रास्ता भी निकालना होगा, वरना रेडीमेड कपड़ों के ऊपर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा। शहर से चर्म उत्पादों के बाद रेडीमेड कपड़ों का निर्यात ही सबसे ज्यादा है।
- राजेश आहूजा, कोषाध्यक्ष, यूपी गारमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
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