मायावती ने भतीजे आकाश आनंद पर फिर जताया भरोसा, अब दी ये बड़ी जिम्मेदारी
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद पर फिर भरोसा जताया है। पूर्व में बसपा प्रमुख ने उनको पार्टी से बाहर कर दिया था और 41 दिन बाद माफी दी थी। अब उनको राष्ट्रीय संयाेजक की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती के बाद पार्टी में इस पद को पार्टी में नंबर दो पर माना जाता है। इसके साथ छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर भी बनाए गए हैं।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद पर फिर भरोसा जताया है। पूर्व में बसपा प्रमुख ने उनको पार्टी से बाहर कर दिया था और 41 दिन बाद माफी दी थी। अब उनको राष्ट्रीय संयाेजक की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती के बाद पार्टी में इस पद को पार्टी में नंबर दो पर माना जाता है। इसके साथ छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर भी बनाए गए हैं।
बसपा में आकाश आनंद का अब तक का सफर बहुत उतार-चढ़ाव वाला रहा है। मायावती ने उनको वर्ष 2019 में पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया था। इसके बाद वर्ष 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था। पिछले दिनों हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद बसपा प्रमुख ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया था।
इसके बाद दो मार्च को आकाश को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया था। अप्रैल में आकाश आनंद ने एक्स पर पोस्ट कर माफी मांगी थी और फिर से पार्टी मे काम करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद मायावती ने उनको वापस ले लिया था। इसके बाद से आकाश पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय बने हुए थे। गुरुवार को बसपा प्रमुख ने आकाश को पार्टी का राष्ट्रीय संयाेजक नियुक्त कर दिया। शुक्रवार को आकाश आनंद ने एक्स पर पोस्ट कर पद मिलने पर मायावती का आभार व्यक्त किया।
इसके साथ ही रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक को राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर बनाया गया है। विश्वनाथ पाल को फिर से उप्र का अध्यक्ष बनाया गया गया है। वहीं राजेश तंवर को दिल्ली, रमाकांत पिप्पल को मध्य प्रदेश, श्याम टंडन को छत्तीसगढ़, शंकर महतो को बिहार ओर डा. सुनील डोंगरे को महाराष्ट्र का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। कहा जा रहा है कि आकाश आनंद की जिम्मेदारी सभी सेक्टर, केंद्रीय और स्टेट कोआर्डिनेटरों और प्रदेश अध्यक्षों की काम की समीक्षा करना होगा। वह सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है।
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