India GDP Growth: भारत की जीडीपी साल 2047 तक कितनी होगी? डिप्टी सीएम ने कर दिया एलान
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है। कृषि इंजीनियरिंग और सरकारी योजनाओं से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। 2047 तक जीडीपी को 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है जिसके लिए कृषि क्षेत्र को 7% की दर से बढ़ाना होगा। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। कृषि सदैव भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। पहले किसानों की आय बहुत सीमित थी, परंतु समय के साथ उनकी आय में वृद्धि हुई है। यह प्रगति कृषि इंजीनियरिंग, आधुनिक तकनीकों और सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का नतीजा है।
भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वर्ष 2047 तक लगभग 30 ट्रिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वर्तमान में लगभग 43 प्रतिशत जनसंख्या कृषि से जुड़ी हुई है। कृषि क्षेत्र की वर्तमान वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत से कम है।
विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र को सात प्रतिशत की दर से बढ़ाना आवश्यक है, जिसके लिए कृषि इंजीनियर्स मुख्य भूमिका निभाएंगे। यह बातें उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को रिवर बैंक कालोनी स्थित इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश स्टेट सेंटर, लखनऊ द्वारा 37वां राष्ट्रीय अधिवेशन आफ एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स के आयोजन में कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. वी.बी. सिंह ने करते हुए कहा कि पहले किसानों की आय बहुत सीमित थी, लेकिन कृषि इंजीनियरिंग, आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं के कारण किसानों की मासिक आय में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
विशिष्ट अतिथि इंटेग्रल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एस.डब्ल्यू. अख्तर ने कहा कि वर्ष 2015–16 में औसत मासिक कृषक परिवार की आय लगभग 8,059 रुपये थी। सरकारी नीतियों, तकनीकी हस्तक्षेप और कृषि इंजीनियरिंग में किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर उप महानिदेशक (इंजीनियरिंग) आइसीएआर डा. एस.एन. झा, संतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ के कुलपति डा. आइ.एम. मिश्रा सहित कई विश्वविद्यालय के कुलपति व पूर्व कुलपति ने शिरकत की।
यह सम्मानित भी हुए
कार्यक्रम में इं. पी.आर. चौरसिया, पूर्व ए.डी.जी. (इंजीनियरिंग) डा. कंचन के. सिंह, डा. अम्बरीश के. तिवारी, डा. डी. श्रीगिरि, डा. जाधव महेश लक्ष्मण, और डा. सी. टी. रामचंद्र को सम्मानित किया गया।
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