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    UP News: दो साल में 10 हजार स्ट्रीट लाइटें हुई चोरी, चोरों में इन शहरों को बनाया निशान

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 12:14 AM (IST)

    लखनऊ में मरम्मत के नाम पर चोरों का गिरोह स्ट्रीट लाइटें निकालकर चंपत हो जाता था जिससे कई इलाके अंधेरे में डूब गए हैं। रायबरेली रोड और जानकीपुरम क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। नगर निगम और ईईसीएल के बीच भुगतान विवाद के कारण नई लाइटें नहीं लगाई जा सकीं। अंधेरे के कारण आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं।

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    दो साल में चोरी हो गई 10 हजार स्ट्रीट लाइटें। फाइल फोटो

    जागरण टीम, लखनऊ। मरम्मत करने के नाम पर चोरों का गैंग स्ट्रीट लाइटें निकालकर चंपत हो जाता था। चोरी करने वालों के वाहन पर नगर निगम भी लिखा रहता है। कारण यह है कि दो साल पहले साउथ सिटी में सीसीटीवी में कैद हुए युवकों को स्ट्रीट लाइट उतारकर ले जाते देखा गया, जिनके वाहन पर नगर निगम लिखा था।

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    चोरों के गैंग ने सबसे अधिक निशाना रायबरेली रोड और जानकीपुरम क्षेत्र को बनाया था। चोरी की गई लाइटों की जगह नई लाइटें न लगाए जाने से सड़कों पर शाम के बाद अंधेरा दूर नहीं हो पाया और उसका असर आज तक है।

    दरअसल स्ट्रीट लाइटों को लगाने का काम नगर निगम ने ईईसीएल को दिया था। नगर निगम और ईईसीएल के बीच लंबे समय से भुगतान को लेकर चल रहे विवाद के कारण कंपनी ने भी चोरी गई लाइटों की जगह नई लाइटें नहीं लगाई थी। अब देखिए वृंदावन कालोनी के मुख्य मार्ग और शहीद पथ सर्विस लाइन से दो साल पहले चोरी हुईं सौ से अधिक स्ट्रीट लाइटें अब तक नहीं लगाई गईं।

    जैसे ही शाम ढलती है पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे और झाड़ियों के बीच राहगीरों का पैदल चलना खतरे से खाली नहीं रहता। चोरी, छेड़छाड़, चेन स्नेचिंग और सड़क हादसे जैसी वारदातें भी लगातार बढ़ रही हैं। चोरी के बाद खंभों पर सिर्फ पाइप दिखते है।

    आदेश यह है कि खराब स्ट्रीट लाइट हटाते ही तुरंत नई लगाई जाएं।  यही हाल जानकीपुरम का है। लक्ष्मण गोशाला वाली रोड पर शाम बाद ही दूर तक अंधेरा नजर आता है। लोगों को वाहन की लाइट के सहारे ही चलना पड़ता है।

    नगर निगम मार्ग प्रकाश विभाग के मुख्य अभियंता मनोज प्रभात भी मानते हैं कि दो साल के दरम्यान 10 हजार स्ट्रीट लाइटें चोरी हुई हैं और उसका मुकदमा लिखाने के साथ ही ईईसीएल के बिल से कटौती भी की गई है।

    अभी भी बकाया है 65 करोड़

    ईईसीएल की नगर निगम पर अब भी 65 करोड़ की देनदारी है। एक जून को ईईसीएल से अनुबंध ख त्म होने के बाद से मार्ग प्रकाश विभाग की व्यवस्था लड़खड़ा गई और स्ट्रीट लाइटें भगवान भरोसे हो गई। शिकायत करने पर उसे झूठी रिपोर्ट देकर निस्तारित दिखा दिया जाता था, जबकि ईईसीएल को भुगतान करने के साथ ही नगर निगम खुद के बजट से भी अतिरिक्त रकम खर्च करता था।

    इसमें वर्तमान समय ही बिजली के सामान खरीदने पर 650 लाख, स्ट्रीट लाइटों के नए कार्यों पर 500 लाख, मरम्मत पर 600 लाख, अस्थायी मार्ग प्रकाश पर 300 लाख है।

    इसमें ईईसीएल के बकाया भुगतान के लिए 4800 लाख के बजट का प्रविधान किया गया है। अपर नगर आयुक्त ललित कुमार यह सफाई देते हैं कि नगर निगम बजट को विस्तारित क्षेत्रों के साथ ही अनुरक्षण कार्य में खर्च किया गया।