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    फर्जी एफडी कर वन निगम के खाते से 64.82 करोड़ रुपये की हेराफेरी, मुकदमा दर्ज 

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 11:12 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश वन निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद सिंह ने बैंक आफ इंडिया की सदर शाखा के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ शाखा पर फर्जी एफडी से विभाग के 64.82 कर ...और पढ़ें

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    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। उत्तर प्रदेश वन निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद सिंह ने बैंक आफ इंडिया की सदर शाखा के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ शाखा पर फर्जी एफडी से विभाग के 64.82 करोड़ रुपये फर्जी खाते में हस्तांतरित करने का आरोप गाजीपुर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों में हेरफेर के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद सिंह ने तहरीर में लिखा है कि बैंक आफ महाराष्ट्र में 64.82 करोड़ रुपये एफडी कराई गई थी।

    प्रबंध निदेशक का कहना है कि इसकी मेच्योरिटी (परिपक्वता) के बाद दोबारा फिक्स करने के लिए 29 दिसंबर 2025 को ई-मेल भेजकर बैंकों से 30 दिसंबर तक प्रस्ताव मांगा गया था। उसी दिन शाम चार बजे समिति के सामने निविदा बाक्स में पड़ीं विभिन्न बैंकों की निविदाएं खोली गईं। बैंक आफ इंडिया सदर शाखा की दर 6.73 प्रतिशत मिली, जो सबसे अधिक थी।

    बैंक ऑफ इंडिया के नान कालेबल दर 6.70 प्रतिशत पर एक साल के 64.82 करोड़ रुपये की एफडी करने को कहा गया। निविदा के समय मौजूद निगम के सहायक लेखाकार राजकुमार गौतम ने पांच जनवरी को बैंक आफ इंडिया के कर्मी से मूल रसीद मांगी।

    कर्मी ने जो रसीद उपलब्ध कराई वह केवल 6.82 करोड़ की थी। यह देखकर छह जनवरी को एफडी की पुष्टि के लिए बैंक को फिर से पत्र लिखा गया लेकिन बैंक आफ इंडिया की तरफ से रसीद की पुष्टि नहीं की गई। इसके बाद बैंक आफ इंडिया से सात जनवरी को निगम कार्यालय में एक पत्र भेजा गया जिसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश फारेस्ट कार्पोरेशन के नाम से खुले बचत खाते में 64.82 करोड़ रुपये की जगह केवल 6.82 करोड़ रुपये की एफडी 6.25 प्रतिशत की दर से 12 महीने के लिए जमा की गई है।

    गाजीपुर इंस्पेक्टर राजेश मौर्या ने बताया कि बैंक और विभाग से दस्तावेज मांगे गए हैं। इसी आधार पर छानबीन की जाएगी। इस बारे में बैंक आफ इंडिया के आपरेशन हेड एनडी पांडेय से बात करने का प्रयास किया गया। उन्हें मैसेज भी किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।