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    Zero Poverty Campaign: जीरो पावर्टी अभियान से 3.72 लाख परिवारों के बदले हालात, मिली मूलभूत सुविधाएं

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 07:10 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में जीरो पावर्टी अभियान ने 10 महीने में 13 लाख से अधिक गरीब परिवारों की पहचान की है जिनमें से 3.72 लाख को योजनाओं का लाभ मिला है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक प्रदेश को गरीबी मुक्त करना है। इस अभियान में रोजगार आवास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं और चिह्नित परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।

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    जीरो पावर्टी अभियान से 3.72 लाख परिवार के बदले हालात।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में चल रहे जीरो पावर्टी अभियान ने मात्र 10 माह में नई मिसाल कायम की है। अगस्त 2025 तक प्रदेश के 13,32,634 निर्धनतम परिवारों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 3,72,000 से अधिक परिवारों को अब तक योजनाओं का सीधा लाभ मिल चुका है।

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    सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक प्रदेश को पूरी तरह गरीबी मुक्त बनाना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर इस अभियान की घोषणा की थी और दो अक्टूबर 2024 को इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत से 25 निर्धन परिवारों को चिह्नित कर गरीबी की रेखा से ऊपर लाना है।

    इसी क्रम में रोजगार, आजीविका, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। अभियान के तहत प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर परिवारों की पहचान की गई। सबसे अधिक 42,082 निर्धन परिवार आजमगढ़ में चिह्नित हुए।

    इसके बाद जौनपुर में 39,374, सीतापुर में 36,571, हरदोई में 30,050 और प्रयागराज में 28,935 परिवार चिह्नित किए गए। इन जिलों में पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से अधिक से अधिक परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

    अभियान के तहत चिन्हित परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। बच्चों को शिक्षा और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।

    प्रदेश सरकार का कहना है कि जीरो पावर्टी अभियान सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाने का प्रयास है। इसके लिए डेटा-आधारित ट्रैकिंग, नियमित मानीटरिंग और जमीनी पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है।