अष्टदल कमल के खिलते ही, आतिशबाजी से सतरंगी हुआ आसमान, पटाखों से गूंजा बरसाना
बरसाना में राधाष्टमी पर राधारानी का भव्य प्राकट्योत्सव मनाया गया। अष्टदल कमल से राधा के प्रकट होते ही आसमान रोशनी से भर गया। संत विनोद बाबा ने आतिशबाजी का आयोजन किया। राधारानी ने शीश महल और सफेद छतरी से दर्शन दिए। नंदगांव और बरसाना के सेवायतों ने बधाई पद गाए।

रसिक शर्मा, बरसाना । ज्योंही अष्टदल कमल के गर्भ से श्रीराधा प्रकट हुईं। आसमान में रोशनी के सतरंगी सितारे सज उठे। पटाखों की गूंज ने राधा के जन्म की घोषणा कर दी। अनार से निकलती रंग-बिरंगी रोशनी समूचे ब्रजमंडल को रोशन करती रहीं।
प्रसिद्ध संत विनोद बाबा द्वारा आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन किया गया। ब्रह्मांचल पर्वत की आभा भी निराली थी, सतरंगी सागर से सराबोर पर्वत अपने गर्भ में इस उत्सव को समेटे नजर आया। मानों इंद्रदेव भी आराध्या को बधाई देने पहुंचे हों। आसमान से गिरती बूंदें देवताओं की खुशी का इजहार करती नजर आई। वर्षा की धारा श्रद्धा के कदमों में बेड़ियां डालने में असफल रही।
यहां राधारानी का केवल जन्मोत्सव नहीं होता, बल्कि हर वर्ष वे पुनः प्रकट होती हैं। फरुआ छठी महोत्सव की परंपरा इस सत्य की साक्षी है। जिस क्षण वृषभानु नंदनी का प्रकटोत्सव हुआ, मानो सम्पूर्ण सृष्टि थम-सी गई।
आकाश पर चंद्रमा ठहर गए, नक्षत्रों ने मंगलध्वनि की, अष्टदल कमल मुस्कराने लगे। उसी समय आकाश से बरसती बूंदों ने मानो इंद्रदेव के आगमन का संकेत दिया। श्रद्धालु बोले, यहां स्वयं मेघों ने लाड़ली के प्राकट्योत्सव की बधाई दी।
सुबह शीशमहल, शाम को सफेद छतरी से दर्शन
सुबह अभिषेक के उपरांत राधारानी को पीली फरुआ नुमा पोशाक धारण कराई गई और हीरे-जवाहरात से सजे शृंगार के साथ शीश महल से दर्शन दिए। हजारों श्रद्धालु बरसाने वाली की जय के जयघोष करते हुए उनकी झलक पाने को आतुर रहे। शाम होते-होते वही राधारानी सफेद संगमरमर की बनी छतरी पर विराजमान हुईं।
मां कीरत द्वारा परंपरागत रूप से लाडली को बाहर लाकर दर्शन कराए गए। चंद्र जैसी शीतल छतरी में सूर्य समान तेज से दमकती महारानी के दर्शन पाकर भक्त भावविभोर हो उठे। गोस्वामी समाज की कन्याओं ने आरता उतारी और जयकारों से ब्रजमंडल झूम उठा। मान मंदिर, रंगीली महल सहित बरसाना के अन्य मंदिरों में भी जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया।
नंदगांव और बरसाना के सेवायतों ने गाए बधाई पद
नंदगांव और बरसाना के सेवायतों ने बधाई पद गाए। जहां-जहां दृष्टि जाती, वहां केवल राधा नाम का गुणगान सुनाई देता। श्रद्धालु बोले, आज न केवल लाड़ली का जन्म हुआ है, बल्कि हम सबके जीवन में भक्ति, प्रेम और आनंद का पुनर्जन्म हुआ है।
बरसाना का यह दृश्य भक्तों के हृदयों पर अमिट छाप छोड़ गया। आस्था, भक्ति और प्रेम की त्रिवेणी में डूबा राधा जन्मोत्सव हर ब्रजवासी और श्रद्धालु के लिए दिव्य अनुभव बन गया।
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