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    न रोप-वे और न कार... 250 सीढ़ियां चढ़कर श्रीजी राधारानी के दर्शन करने आए संत प्रेमानंद, आंखों से आंसुओं की वर्षा

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 07:36 AM (IST)

    बरसाना में संत प्रेमानंद महाराज ने राधारानी के दर्शन किए। 19 वर्षों से किडनी की बीमारी से जूझ रहे संत प्रेमानंद 250 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचे। दर्शन के दौरान उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। उन्होंने कहा कि यहां राधानाम की अनुभूति बहती है। उनके दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।

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    दर्शन के दौरान भावुक संत प्रेमानंद।

    संवाद सूत्र, जागरण, बरसाना। यह दृश्य बेहद मार्मिक था। एक भक्त का भगवान से मिलन था। संत प्रेमानंद जी राधारानी के उपासक हैं, शनिवार सुबह वह थीं। अपनी आराध्य को सामने पाकर आंसुओं की वर्षा में आंखें भीग गईं। मानों आंखें कह रही हों, बहुत दिनोें से आपके दर्शन की प्यास थी। आज भाव के आंसुओं से बुझ गई। संत प्रेमानंद शनिवार को बरसाना पहुंचे तो श्रीजी के धाम में शीश नवाकर धन्य हो गए। हजारों श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने को व्याकुल थे।

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    अचानक पहुंचे संत के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, गूंजते रहे जयकारे


    सुबह अपनी गाड़ी के कुछ परिकरों के साथ संत प्रेमानंद बरसाना पहुंच गए। कुछ ही देर में चर्चा राधा के पूरे गांव में फैल गई। एक से दूसरे और फिर तीसरे तक चर्चा पहुंची तो हजारों ग्रामीण एकत्र हो गए। करीब 19 वर्षों से किडनी की बीमारी से जूझ रहे संत प्रेमानंद न तो कार से ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित मंदिर पहुंचे और न ही रोपवे का सहारा लिया। करीब 250 सीढ़ियों पर चढ़े और राधारानी के पास पहुंचे।

    बिना किसी आडंबर के कतार में खड़े हुए

    सीढ़ियां चढ़ने की शक्ति मानों राधारानी ने खुद दी हो। बिना किसी आडंबर के कतार में खड़े हुए, गर्भगृह में पहुंचे और राधारानी की मूर्ति के सामने कुछ क्षण मौन रहे। उस समय वातावरण ऐसा लगा मानो मंदिर की घंटियां भी रुक गईं हों और भाव ने सभी ध्वनियों को थाम लिया हो। सामने लाडलीजु थीं तो उनके उपासक की आंखों से आंसू बहना भी स्वाभाविक था। पलकें गीली और आंखें लाडली को निहारतीं।

    यहां हवाएं नहीं चलतीं, यहां राधानाम की अनुभूति बहती है

    करीब एक घंटे तक पूजन किया। फिर इतना बोले, यहां हवाएं नहीं चलतीं, यहां राधानाम की अनुभूति बहती है। संत ने यह कहा और बहुतेरी आंखों से आंसुओं की धारा बह चली। फिर संत प्रेमानंद ने लाडलीजु को प्रणाम किया और सीढ़ियों से नीचे उतरे।