पेड़, बिजली लाइनें और टावर की एक मंजिल है जहाज के रास्ते का रोड़ा, कैसे परवान चढ़ेगी योजना
मेरठ के परतापुर में बन रहे डॉ. भीमराव आंबेडकर हवाई अड्डे के सामने कई बाधाएं हैं। पेड़ों बिजली लाइनों पराग डेयरी की चिमनी और एमडीए कॉलोनी के टावर के कारण विमानों के उड़ान भरने और उतरने में दिक्कत होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने 140 एकड़ जमीन मांगी थी जिसमें से 132 एकड़ उपलब्ध कराई गई है।

जागरण संवाददाता, मेरठ । परतापुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी का विस्तार करके एयरपोर्ट बना भी दिया गया तो यहां से उड़ने वाला जहाज अवरोध में फंसकर रह जाएगा। यहां खड़े पेड़, बिजली की लाइनें, पराग दूध फैक्ट्री की चिमनी और एमडीए की कॉलोनी के टावर की एक मंजिल उसे न उड़ने देंगे और ना ही उतरने देंगे।
एटीआर 72 के लिए जमीन की उपलब्धता का दावा
एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया ने एयरपोर्ट बनाकर पहले चरण में एटीआर 72 विमान उड़ाने के लिए 140 एकड़ जमीन की मांग की थी। जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई सूचना के मुताबिक 132 एकड़ भूमि एयरपोर्ट के लिए उपलब्ध करा दी गई है। जिसमें से 109 एकड़ भूमि को निदेशक नागरिक उड्डयन के नाम दर्ज भी किया जा चुका है।
बाकी 23 एकड़ पर नाम दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है जिसे जल्द पूरा कर लेने का दावा है। जिसके साथ ही पूरी जमीन को एएआइ को हस्तांतरित किया जाएगा। एएआइ की मांग के मुताबिक अब बस 8.59 एकड़ भूमि की कमी है। इसका इंतजाम भी जल्द कर लेने का दावा है।
अब ओएलएस सर्वे की बाधाएं दूर करना लक्ष्य
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने एएआइ से प्राप्त सूचना के आधार पर राज्यसभा सदस्य को पत्र के माध्यम से बताया है कि जुलाई 2022 में एएआइ ने मेरठ में एयरपोर्ट निर्माण के लिए ओएलएस (आब्सटेकल लिमिटेशन सरफेस ) सर्वे कराया था।
यह सर्वे विमान के उड़ान भरने और उतरने के दौरान उसके घुमाव के रास्ते में आने वाली बाधाओं की खोज करने के लिए कराया जाता है। एएआइ की तीन अधिकारियों की टीम ने आठ दिन तक यहां रहकर सर्वे किया था। जिसमें हवाई पट्टी परिसर में खड़े पेड़, हवाई पट्टी की चाहरदीवारी के बाहर खड़े ऊंचे पेड़, हवाई पट्टी परिसर के भीतर और बाहर स्थित बिजली की हाईटेंशन लाइनें, हवाई पट्टी के प्रवेश द्वार के सामने स्थित मेरठ विकास प्राधिकरण की कालोनी एयरपोर्ट एन्क्लेव के टावर की ऊपरी एक मंजिल बाधा है।
पराग डेरी की चिमनी भी जहाज के घूमने के दौरान बाधा बनेगी। राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इन अवरोध को हटवाने की मांग की है। वहीं जिला प्रशासन ने ओएलएस सर्वे की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त न होने की बात कही है। जिसपर राज्यसभा सदस्य ने एएआइ से प्राप्त करके यह रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
मुकदमों के कारण अटकी है शेष 8.59 एकड़ जमीन
एयरपोर्ट निर्माण के लिए आवश्यक भूमि में से केवल 8.59 एकड़ भूमि की कमी है। यह भूमि हवाई पट्टी से हटकर परिसर में किनारे पर स्थित है। जिसे लेकर भूमि मालिक किसानों ने मुआवजा में भूमि की दरों को लेकर न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। जिसकी सुनवाई स्थानीय न्यायालय में चल रही है। जिला प्रशासन का दावा है कि जल्द इसका समाधान करके भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी।
एएआइ की मांग के मुताबिक एयरपोर्ट के लिए आवश्यक भूमि को नागरिक उड्डयन विभाग के नाम दर्ज किया जा रहा है। मात्र 23 एकड़ पर नाम दर्ज किया जाना शेष है। जिसके लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द यह पूरी होगी। हवाई पट्टी के लिए आवश्यक भूमि में से शेष 8.59 एकड़ भूमि पर न्यायालय में मुकदमा है। यह मुआवजे की राशि में दरों को लेकर है। इसका भी जल्द समाधान करा लिया जाएगा। -बृजेश सिंह, एडीएम सिटी
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