मीरजापुर में बाढ़ के पानी में कंधे पर बैठाकर बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे अभिभावक
अहरौरा और जरगो जलाशय के गेट खुलने से किसानों की फसलें डूब गई हैं जिससे आवागमन बाधित हो गया है। अहरौरा चकिया मार्ग एक सप्ताह से बंद है जिससे 30 किमी का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। छिलहिया मार्ग पर बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।

जागरण संवादाता, अहरौरा (मीरजापुर)। लगातार सातवें दिन भी अहरौरा व जरगो जलाशय के दो गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है, जिससे किसानों के फसलों को नुकसान के साथ ही संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से आवागमन में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ के पानी के चलते एक सप्ताह से अहरौरा चकिया मुख्यमार्ग पर आवागमन पूर्ण रूप से बाधित हैं। लगभग 30 किलोमीटर दूर तक चलकर लोगों को पहुंचना पड़ रहा हैं। वही जरगो जलाशय के दो गेट से पानी छोड़े जाने से खुलने से छिलहिया का संपर्क मार्ग बाधित हुआ है।
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स्कूली बच्चों को अभिभावक अपने कंधे पर बैठाकर नदी पार करा रहें हैं। कुछ बच्चे अपनी जान जोखिम मे डालकर नदी तैर कर पार कर रहे हैं। रक्षा बंधन से ही यह मार्ग बाधित हुआ है। झील व पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से जरगो बांध का जल स्तर बढ़ने पर सिंचाई विभाग द्वारा गेट से पानी निकाला जा रहा हैं। इससे दर्जनों गांवों का संपर्क मार्ग बाधित हुआ हैं।
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छिलहिया संपर्क मार्ग पर 10 किलोमीटर की तय करनी पड़ रहा हैं, जिससे बचने के चक्कर में जान जोखिम में डालकर आवागमन हो रहा हैं। दूसरे संपर्क मार्ग में कच्चा रास्ता से होकर जरगो बांध से बाज़ार को जाते हैं अगर कोई बीमार हो जाता हैं तो काफी परेशानिया होती हैं।
एम्बुलेंस जाने का भी रास्ता नहीं हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नाव संचालन की मांग किया है। ग्रामीणों का मांग है कि नदी का पानी बढ़ जाने से आवागमन बंद हो जाता है और इससे आसपास के 10 गांव प्रभावित हो रहे हैं। एक्सईन हरिशंकर प्रसाद ने बताया कि अहरौरा जरगो जलाशय व जरगो से दो गेट से पानी निकाला जा रहा हैं।
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