मीरजापुर में सरिया निकली टपकती छत और जर्जर दीवारों के बीच गुरु जी संवार रहे ‘भविष्य’
बरसात में छत से टपकता पानी सरिया दिखती छत जर्जर दीवारें यह सब मीरजापुर के कई स्कूलों के हाल हैं। स्कूलों की यह बदहाली झेलते गुरु जी और बच्चे हैं तो अधिकारियों की नजर में सब व्यवस्था दुरुस्त ही नजर आती है। उम्मीद कल के भविष्य को सुधारने की है और व्यवस्था काफी दूभर है।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। जनपद में शिक्षा की जमीनी हकीकत सरकारी दावों के ठीक विपरीत नजर आती है। जिले के कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं तो कहीं छत से पानी टपकता है। दीवारों में दरारें पड़ी हैं और कई जगहों पर भवन गिरने की आशंका से बच्चे डरे रहते हैं। कुछ विद्यालयों में छात्रों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
शौचालय की स्थिति दयनीय है, विशेषकर बालिकाओं के लिए अलग से व्यवस्था नहीं होने के कारण पढ़ाई छोड़ने की स्थिति बन जाती हैं। पीने का पानी, बिजली और खेल सामग्री जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। अभिभावक चिंतित हैं और शिक्षक भी असुविधाजनक माहौल में काम करने को मजबूर हैं। शिक्षा का यह असंतुलित और उपेक्षित रूप बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह हालात दर्शाते हैं कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर सीमित रह गई हैं, जबकि 121 चिह्नित जर्जर परिषदीय विद्यालय कुछ और ही बयान कर रहे हैं। प्रस्तुत है \Bदैनिक जागरण टीम \Bकी रिपोर्ट...।
अतिरिक्त कक्ष जर्जर होने से पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ रहे बच्चे
वर्ष 2010 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय पटेहरा में बना अतिरिक्त कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। मुख्य भवन की छत एवं फर्श का मरम्मतीकरण कार्य होने से बच्चों को परिसर स्थित पीपल के नीचे चबूतरे पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं एक अतिरिक्त कक्ष में सभी बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। सहायक अध्यापक ओमप्रकाश ने बताया कि विद्यालय के छत का मरम्मतीकरण कार्य शुरू होने से बच्चों को एक अतिरिक्त कक्ष और चबूतरे पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक अतिरिक्त कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, खतरे को देखते हुए उसमें बच्चों को नहीं बैठाया जाता है।
प्राथमिक विद्यालय लालपुर में जर्जर हो चुके कक्ष
विकास खंड हलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय लालापुर वर्ष 2012 में बनाया गया था। इसमें तीन अतिरिक्त कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य होने से अतिरिक्त कक्ष दो तीन साल बाद ही जर्जर हो गए। अतिरिक्त कक्ष का उपयोग नही होने से उसमें कबाड़ रख दिया गया है। खिड़कियों के उपर बना छज्जा जर्जर हाल में है। खिड़की और दरवाजों से काम चलाया जा रहा है। प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार ने बताया प्राथमिक विद्यालय लालापुर में 55 बच्चों का पंजीकरण कराया गया है।
जर्जर हो चुका यूपीएस भैसोड़ बलाय पहाड़, अतिरिक्त कक्ष नाकाफी
विकास खंड हलिया स्थित भैसोड़ बलाय पहाड़ गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। दरवाजे और खिड़कियां जर्जर हो चुके हैं। फर्श खराब हो चुका है। बच्चों को अतिरिक्त कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जाता है। विद्यालय में नामांकित 192 बच्चों को बैठने के लिए अतिरिक्त कक्ष नाकाफी साबित हो रहा है। उच्च प्राथमिक विद्यालय का नवनिर्माण कराने की आवश्यकता है। बीइओ हलिया प्रकाश चंद यादव के अनुसार जर्जर भवन के नव निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। संबंधित अध्यापकों को जर्जर भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाने से मना किया गया है।
बोले अभिभावक व ग्रामीण
प्राथमिक विद्यालय पटेहरा के जर्जर हो चुके अतिरिक्त कक्ष का निर्माण करवाने की आवश्यकता है। बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। - महेंद्र, अभिभावक, पटेहरा।
- प्राथमिक विद्यालय लालापुर के बनाए गए सभी अतिरिक्त कक्ष जर्जर हो चुके हैं, इसका नवनिर्माण करवाया जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय में चहारदीवारी का निर्माण करवाने की आवश्यकता है। - राजेश शर्मा, ग्राम लालापुर।
- उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन पूरी से जर्जर होने से बच्चों को अतिरिक्त कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जाता है। अतिरिक्त कक्ष में सभी बच्चों को बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है। बच्चों के पठन-पाठन की समस्या को देखते हुए जल्द से जल्द उच्च प्राथमिक विद्यालय का नवनिर्माण कराया जाए। - शांती देवी, अभिभावक भैसोड़ बलाय पहाड़।
- वर्ष 1984 में निर्मित उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए विद्यालय का नवनिर्माण कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। - चंद्रकली, ग्राम प्रधान भैसोड़ बलाय पहाड़।
पीडब्ल्यूडी विभाग से आगणन मिलते ही कराया जाएगा निर्माण
जनपद में लगभग 121 परिषदीय विद्यालयों के भवन अथवा कक्ष जर्जर हालत में हैं। आरईएस व लघु सिंचाई विभाग से सर्वे हो चुका है। जर्जर भवन का न्यूनतम मूल्य पीडब्लूडी विभाग द्वारा आज 75 भवनों का दिया गया है, शेष देने का आश्वासन दिया गया है। इन विद्यालयों में कुछ में स्थान होने पर अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनवाया गया है, कुछ में पहले से भवन व कक्ष हैं, जिसमें बच्चों की पढ़ाई हो रही है। इसके साथ ही निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में जर्जर स्कूल भवन-कक्ष में पढ़ाई न कराई जाए। पीडब्ल्यूडी विभाग से आगणन मिलते ही जर्जर भवन या कक्ष की नीलामी कराकर निर्माण कराया जाएगा। - अनिल कुमार वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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