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    Noida News: ठगी करने वाले गिरोह के 4 सदस्यों की जमानत खारिज, नोएडा में खोला था फर्जी इंटरनेशनल थाना

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 09:20 AM (IST)

    नोएडा में फर्जी IB और विदेशी पुलिस का दफ्तर खोलकर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों की जमानत जिला न्यायालय ने खारिज कर दी। न्यायाधीश मलखान सिंह ने इसे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर मामला मानते हुए पुलिस कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं। संस्था को पंजीकृत करने में उप निबंधक और लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

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    पुलिस की गिरफ्त में ठगी के आरोपित। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नोएडा में आइबी और विदेशी पुलिस का फर्जी दफ्तर खोलकर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों की जमानत जिला न्यायालय ने खारिज कर दी। जिला न्यायाधीश मलखान सिंह ने इस मामले को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर मानते हुए पुलिस कमिश्नर को प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने के लिए निर्देशित किया है।

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    फर्जी संस्था को पंजीकृत करने में उप निबंधक नोएडा प्रथम यशवंत कुमार व लिपिक विवेक शर्मा की भूमिका को भी संदिग्ध पाया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि उप निबंधक व लिपिक ने संस्था को पंजीकृत करने से पहले दस्तावेज की गंभीरता से जांच नहीं की। प्रकरण में व्यापक जांच के आदेश दिए।

    नोएडा पुलिस ने 10 अगस्त को नोएडा के सेक्टर 70 स्थित बीएस 136 में इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो का ऑफिस संचालित होने की सूचना पर छापा मारकर मौके से विभाष चंद्र अधिकारी, आरग्य अधिकारी, बाबूल चंद्र मंडल, पिंटू पाल, समापदमल और आषीश कुमार को गिरफ्तार किया था।

    मौके से नौ मोबाइल, 17 मोहर, छह चेक बुक, छह आईडी कार्ड, एक पेनकार्ड व एक वोटर कार्ड, छह एटीएम कार्ड, एक सीपीयू, चार इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो के बोर्ड व 42 हजार 300 रुपये व अन्य दस्तावेज बरामद किए थे।

    राजनेताओं के साथ की थी धोखाधड़ी

    आरोपित फर्जी दस्तावेज और पुलिस के लोगो लगाकर राजनेताओं व अन्य के साथ धोखाधड़ी करते थे। आरोपितों की ओर से दाखिल जमानत अर्जी में पुलिस के आरोपों को झूठा बताते हुए दावा किया था कि उनकी संस्था आइपीसीआई के नाम से उप निबंधक नोएडा में पंजीकृत है।

    इसके साथ ही आयुष मंत्रालय में भी पंजीकृत है। इसके साथ ही आरोपितों की ओर से कहा गया कि इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो एक प्राईवेट संस्था है जो प्राईवेट इनवेस्टिगेशन व पीड़ित पक्ष की सहायता के लिए अन्वेषण साक्ष्य व सही तथ्यों को प्रकाश में लाने में सहयोग करती है। ॉ

    आरोपितों ने इंटरपोल का आईडी बरामद होने के आरोप को गलत बताते हुए इसे एशियन इंटरपोल का बताया। पत्नी व आरोपितों की बीमारी व उम्र अधिक होने और कलकत्ता उच्च न्यायालय में पारित एक आदेश का भी फायदा उठाने का प्रयास किया। इन्हीं को आधार बनाकर न्यायालय से जमानत देने का अनुरोध किया। लेकिन पुलिस की ओर से न्यायालय में आरोपितों के खिलाफ मजबूती से पैरवी करते हुए जमानत का विरोध किया गया।

    तर्क दिया गया कि पुलिस का लोगो व खुद को सरकारी अधिकारी बनकर राजनीतिक लोगों को प्रभाव में लेकर धोखाधड़ी करने के लिए आरोपितों ने संस्था बनाई है। छापे के दौरान संस्था के कार्यालय से फर्जी व जाली दस्तावेज बरामद हुए थे।

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय व आयुष मंत्रालय ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए मौके से मिले दस्तावेज को फर्जी बताया। इसके साथ ही इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो की ट्रस्ट डीड को कानून विरुद्ध बताया।

    पुलिस विभाग से मिलता जुलता लोगो लगाकर धोखाधड़ी व देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। जिला न्यायाधीश मलखान सिंह ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद विभाष चंद्र अधिकारी, आरग्य अधिकारी, बाबूल चंद्र मंडल और आशीष कुमार की जमानत खारिज कर दी।

    विवेचक द्वारा प्रकरण की सही विवेचना न करने के चलते देश की सुरक्षा से जुड़ा अपराध होना मानते हुए पुलिस कमिश्नर को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। उप निबंधक व लिपिक द्वारा इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो संस्था का पंजीकरण करने की विस्तृत जांच करने के आदेश दिए।

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