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    प्रतापगढ़ में भीषण सड़क हादसा, अनियंत्रित डंपर ने बाइक सवार दारोगा को कुचला, चली गई जान, महिला थाने में थे तैनात

    By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 26 Oct 2025 01:19 PM (IST)

    प्रतापगढ़ में एक दुखद घटना में अनियंत्रित डंपर ने बाइक सवार दारोगा को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक दारोगा महानंद त्रिपाठी महिला थाने में तैनात थे और एक मुकदमे की विवेचना के लिए अंतू की ओर जा रहे थे। दुर्घटना के बाद डंपर चालक फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस सीसीटीवी फुटेज की मदद से कर रही है।

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    प्रतापगढ़ में शनिवार सुबह डंपर के कुचलने से मृत बाइक सवार दारोगा महानंद त्रिपाठी। जागरण 

    जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। प्रयागराज-अयोध्या बाईपास पर प्रतापगढ़ में रविवार सुबह भीषण सड़क हादसा हुआ। अनियंत्रित डंपर ने बाइक सवार उप निरीक्षक (दारोगा) को कुचल दिया। बाइक सवार उप निरीक्षक को अनियंत्रित डंपर ने पहले टक्कर मारी और फिर सिर कुचलते हुए भाग निकला। मौके पर ही उप निरीक्षक ने दम तोड़ दिया। हादसे में मौके पर ही दारोगा की मौत हो गई। उधर दुर्घटना के बाद वाहन लेकर चालक फरार हो गया। 

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    प्रतापगढ़ में महिला थाना में तैनात थे महानंद

    चित्रकूट जनपद के सरधुआ गांव (थाना सरधुआ) निवासी 56 वर्षीय महानंद त्रिपाठी पुत्र स्वर्गीय बद्री प्रसाद उप निरीक्षक के पद पर प्रतापगढ़ के महिला थाना में तैनात थे। चार साल बाद अप्रैल 2029 में उनको रिटायर होना था। चित्रकूट जनपद के सरधुआ गांव (थाना सरधुआ) निवासी 56 वर्षीय महानंद त्रिपाठी पुत्र स्वर्गीय बद्री प्रसाद उप निरीक्षक के पद पर प्रतापगढ़ के महिला थाना में तैनात थे। तीन साल पहले ही वह सिपाही से प्रमोट होकर दारोगा बने थे।

    pratapgarh road accident

    बाइक से मुकदमे की विवेचना के सिलसिले में जा रहे थे

     वह अपनी बाइक से मुकदमे की विवेचना के सिलसिले में रविवार को अंतू की ओर सुबह करीब नौ बजे जा रहे थे। गड़वारा रोड से वह बाईपास पर चढ़े। सराय वीरभद्र के पास बाइक रोककर उतरे और किनारे जाकर किसी से मोबाइल पर बात करने लगे। हेलमेट को हैंडल में टांग दिया। बात करने के बाद वह बाइक पर बैठे ही थे कि इसी बीच मोहनगंज की ओर जा रहा बेकाबू डंपर उनके लिए काल साबित हुआ। उससे सामने से टक्कर लगने से वह बाइक समेत गिर गए।

    भागने के चक्कर में दारोगा के सिर पर चढ़ा दी गाड़ी

    मौके से भागने के चक्कर में उनके सिर पर गाड़ी चढ़ाता हुआ चालक भाग निकला। आबादी का क्षेत्र न होने से कुछ देर तक घटनास्थल पर लोग नहीं पहुंच पाए। किसी राहगीर ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मेडिकल कालेज चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंप दिया गया।

    अधिकारियों ने स्वजन को सांत्वना दी

    सहायक पुलिस अधीक्षक सीओ सिटी प्रशांत राज समेत अधिकारी भी पहुंचे। स्वजन को सांत्वना दी। महानंद दो बेटियों व एक बेटा, पत्नी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। दारोगा के पुत्र विपिन कुमार की तहरीर पर अंतू थाने में घटना का दर्ज कर लिया गया है। पुलिस तलाश कर रही है।

    सीसीटीवी फुटेज से फरार चालक की तलाश

    आबादी का क्षेत्र न होने से कुछ देर तक घटनास्थल पर लोग नहीं पहुंच पाए। किसी राहगीर ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। सहायक पुलिस अधीक्षक (सीओ सिटी) प्रशांत राज ने बताया कि हादसे में उप निरीक्षक की मौत हुई है। डंपर और उसके चालक को सीसीटीवी फुटेज की मदद से पकड़ा जाएगा। उप निरीक्षक के परिवार को सूचना दी गई है। वह लोग आ रहे हैं।

    एसपी ने जताया दुख

    प्रतापगढ़ के एसपी दीपक भूकर ने कहा कि सड़क हादसे में उपनिरीक्षक की मौत हुई है। पुलिस परिवार दुखी है। डंपर और उसके चालक को पकड़ लिया गया है। हादसे का केस करके जांच कराई जा रही है। 

    संघर्षपूर्ण जिंदगी रही महानंद की 

    सड़क हादसे के शिकार बने उपनिरीक्षक महानंद त्रिपाठी की जिंदगी काफी संघर्षपूर्ण रही। सिपाही से दारोगा तक का सफर तय करने वाले महानंद कर्तव्यों के प्रति इतने समर्पित रहते थे कि खाना-पानी में अक्सर देर कर देते थे। साथियों से खाना खाने का वादा करके आखिरकार वह नहीं लौटे और निवाला ग्रहण करने से पहले उनको मौत निगल गई।

    पिता का साया उठने पर जिम्मेदारियों का था बोझ

    पिता बद्री प्रसाद के न रहने पर सारी जिम्मेदारी उनके ही सिर पर थी। इन्होंने उसे निभाया भी। अपनी पत्नी सुनीता का साथ पाते हुए वह जिंदगी में आगे बढ़ते रहे। दारोगा नेक दिल थे। उनकी मौत पर विभाग के लोग उनकी अच्छाइयों की चर्चा कर रहे हैं।

    मधुर व्यवहार व सहयोगी स्वभाव के थे

    इनके साथी दारोगा राम सेवक, दीवान रफीक समेत साथी बताते हैं कि महानंद चाय-नाश्ते का पैसा कभी दूसरे को नहीं देने देते थे। कहते थे कि वह सीनियर हैं तो उनकी अधिक जिम्मेदारी है। मधुर व्यवहार, सहयोगी स्वभाव, मिलनसार कार्यशैली की महकमे में चर्चा है।

    प्रमोशन पर परिवार खुशी से झूम उठा था 

    जब सिपाही से इनका प्रमोशन दारोगा के पद पर हो गया तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई थी...लेकिन एक झटके में सब बिखर गया। कार्य को अधिक महत्व देने वाले दारोगा पुलिस लाइन के क्लब हाउस में रहते थे।

    लौट कर खाना खाने की बात कहकर गए थे

    रविवार सुबह वह खाना खाकर नहीं निकले। साथियों ने कहा कि इतनी सुबह जा रहे हैं, खाना नहीं खाएंगे क्या...। इस पर वह बोले कि मेरा खाना रख दीजिए, विवेचना से लौटने पर खा लेंगे वहां जाना जरूरी है, लेकिन ऐसा न हो सका और खाना रखा रह गया। 

    नम आंखों से चढ़ाया पुष्प चक्र

    दारोगा के पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन के स्मारक पर लाया गया। वहां नम आंखें से एसपी दीपक भूकर, एएसपी पूर्वी शैलेंद्र लाल, पश्चिमी बृजनंदन राय, आइपीएस प्रशांत राज समेत पुलिस अधिकारियों ने पुष्प चक्र चढ़ाकर दारोगा को श्रद्धांजलि दी। 

    बच्चों की पढ़ाई को आ गए थे बांदा

    गड़वारा प्रतिनिधि के अनुसार चित्रकूट के मूल निवासी महानंद ने अपनी दो बेटियों अर्चना और अंजना के साथ ही बेटे विपिन की धूमधाम से शादी की थी। पुलिस में नौकरी मिलने पर वह बच्चों की पढ़ाई के लिए बांदा में आकर रहने लगे। बांदा शहर में केवटरा मुक्ति धाम मार्ग पर इनका पूरा परिवार रहता है। प्रतापगढ़ आने से पहले महोबा में तैनात थे और ढाई साल से प्रतापगढ़ में सेवा दे रहे थे। जिस सुपर स्प्लेंडर बाइक पर सवार होकर जा रहे थे, वह इन्होंने महोबा में नौकरी के दौरान खरीदी थी। 

    अरे महानंद भैया...ये क्या हो गया

    दर्दनाक हादसे की मनहूस खबर पाने पर दारोगा के पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी सुनीता और बेटियां सदमे में होने के कारण नहीं आ पाईं। बेटा विपिन रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। पापा की लाश देखकर बिलख पड़ा। दारोगा की बहनें शोभा देवी और पद्मा देवी की भी चीख निकल गई। वह कहने लगीं...अरे महानंद भैया, ये क्या हो गया। रखिया पै तौ मिला रह्या...। लाश को देखकर बहनोई शेष नारायण के साथ ही भांजे कृष्ण कुमार व अवनीश समेत अन्य रिश्तेदार तथा परिचित और मित्र भी अपने आंसू नहीं रोक सके।

     

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