Prayagraj News : क्या आपने कटरा मुहल्ले का स्वादिष्ट मोदक खाया, जरूर चखें, इसमें है सिद्धि विनायक मंदिर के मोदक का स्वाद
प्रयागराज के कटरा चौराहे पर कान्हा स्वीट्स के मोदक अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। श्याम बाबू गुप्ता ने मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर के मोदक से प्रेरित होकर वर्ष 2000 में दुकान शुरू की। यहाँ खोया केसर मूंग दाल बेसन समेत सात तरह के मोदक मिलते हैं। शुद्धता और स्वाद का विशेष ध्यान रखा जाता है। हरतालिका तीज से गणेश चतुर्थी तक इनकी मांग अधिक रहती है।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जब बात मोदक की आती है, तो मन में भगवान गणेश की छवि और उनके प्रिय व्यंजन का स्वाद तैरने लगता है। मोदक जो गणपति का प्रिय प्रसाद है, अब प्रयागराज के कटरा चौराहे पर अपनी विशेष पहचान बना चुका है।
कहरा स्थित कान्हा स्वीट्स है। यहां के श्याम बाबू गुप्ता ने मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर के मोदक से प्रेरित होकर वर्ष 2000 में एक ऐसी दुकान शुरू की, जो आज शहर की मिठास का पर्याय बन चुकी है। कटरा के ये मोदक न केवल स्वाद में बेजोड़ हैं, बल्कि शुद्धता और आस्था का भी प्रतीक है।
श्याम बाबू गुप्ता बताते हैं कि सिद्धि विनायक मंदिर में मोदक का स्वाद और उसका आकार देखकर वे मंत्रमुग्ध हो गए। इस अनुभव ने उन्हें प्रयागराज में भी ऐसा ही स्वाद लाने की प्रेरणा दी। मुंबई से लड्डू बनाने का सांचा और मोदक की विधि सीखकर उन्होंने कटरा में कान्हा स्वीट्स की नींव रखी। शुरुआत में केवल दो प्रकार के मोदक बनते थे, लेकिन आज सात तरह के मोदक ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हैं।
इनमें खोया, केसर, मूंग दाल, बेसन, और बूंदी जैसे विविध स्वाद शामिल हैं। मोदक बनाने की कला मोदक बनाने की प्रक्रिया में शुद्धता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। सफेद मोदक खोया और इलायची के मिश्रण से तैयार होता है, जबकि पीला मोदक केसर की सुगंध और रंग से सजता है। मूंग दाल का मोदक खास है, जिसमें 20 प्रतिशत उड़द दाल मिलाकर सुनहरा रंग और अनोखा स्वाद लाया जाता है।
खोवा दुकान में ही विशेष मशीन से तैयार किया जाता है ताकि उसकी ताजगी और शुद्धता बनी रहे। मूंग दाल को स्वयं पीसा जाता है और फिर देशी घी में भूना जाता है। ड्राई फ्रूट्स की फीलिंग के लिए दिल्ली और कोलकाता से जांचा-परखा माल मंगवाया जाता है, जबकि केसर पंजाब से आता है। हर मोदक को शुद्ध देशी घी में बनाया जाता है, जो इसे खास बनाता है।
कटरा के मोदक की सबसे बड़ी खासियत उनकी शुद्धता और स्वाद में छिपी है। ड्राई फ्रूट्स से भरे ये मोदक न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि गणपति के प्रसाद के रूप में आस्था का भी प्रतीक हैं। मूंग दाल के मोदक का स्वाद ऐसा है कि एक बार खाने के बाद यह समझ आता है कि आखिर गणपति को यह क्यों इतना प्रिय है। इसका कुरकुरा बाहरी हिस्सा और भीतर की नरम, सुगंधित फीलिंग हर किसी को लुभाती है।
मांग और लोकप्रियता हरतालिका तीज से शुरू होकर गणेश चतुर्थी के दस दिनों तक कटरा के मोदक की मांग चरम पर रहती है। शिवबाबू गुप्ता बताते हैं कि कई दिन पहले से ही आर्डर आने शुरू हो जाते हैं। इस दौरान दुकान में सिर्फ मोदक ही बनाए जाते हैं। पूरे प्रयागराज में कटरा के मोदक की अपनी अलग पहचान है, क्योंकि यह शहर में इस तरह के मोदक बनाने वाली पहली दुकान थी।
कटरा के मोदक केवल मिठाई नहीं बल्कि आस्था, शुद्धता और स्वाद का संगम हैं। श्याम बाबू और उनकी कान्हा स्वीट्स ने न केवल गणपति के प्रिय प्रसाद को प्रयागराज में जीवंत किया, बल्कि इसे शहर की सांस्कृतिक और स्वादिष्ट पहचान का हिस्सा बना दिया। एक बार इन मोदक का स्वाद चखने वाला हर व्यक्ति इसके दीवाना हो जाता है, और यही इसकी सच्ची विशेषता है।
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