Former ZPM Murder Case : 23 जुलाई को पत्नी की तेरहवीं पर उदय ने खाई थी कसम... एक माह में मार दूंगा रणधीर को
प्रयागराज में पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव की हत्या का आरोपfr उदय यादव ने पत्नी की तेरहवीं पर रणधीर को मारने की कसम खाई थी। उसने रणधीर को अपनी पत्नी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद हत्या की साजिश रची। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज से हत्याकांड का राजफाश हुआ।

राजेंद्र यादव, प्रयागराज। पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव की हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरी साजिश के तहत इसे अंजाम दिया गया। 23 जुलाई को अपने करीबी रिश्तेदारों के सामने मुख्य आरोपित उदय यादव ने पत्नी अंजली की तेरहवीं के दिन कसम खाई थी कि एक माह के भीतर रणधीर यादव को जान से मार देगा। हुआ भी ऐसा ही।
एक माह पूरे होने के एक दिन पहले यानी 22 अगस्त की रात ही रणधीर यादव का कत्ल कर दिया गया। आश्चर्य की बात यह रही कि हत्या के बाद स्कार्पियो में लाश रखकर आरोपित शहर से होते हुए बमरौली रेलवे स्टेशन स्थित आउटर पर पहुंच गए और कहीं भी पुलिस की नजर इन पर नहीं पड़ी। तुलसीराम का पूरा इब्राहिमपुर नवाबगंज निवासी उदय यादव से रणधीर यादव की जान पहचान करीब चार वर्ष पहले जिला पंचायत चुनाव के दौरान हुई थी। रणधीर की पत्नी बबली जिपंस पद के लिए मैदान में थीं और रणधीर के कहने पर उदय ने पक्ष में प्रचार किया था।
जानें पूरा मामला
उदय एक निजी अस्पताल में कंपाउंडर का काम कर रहा था, लेकिन रणधीर ने उसे अपने प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। जिस कारण उदय इंटरनेट मीडिया के फेसबुक, वाट्सएप आदि पर रणधीर यादव का प्रचार प्रसार करता था। इस दौरान रणधीर का उसके घर आना-जाना था। हालांकि, तब तक उदय को उस पर कोई संदेह नहीं था। जून के अंतिम सप्ताह में रणधीर ने उदय के साथ मिलकर नैनीताल चलने की योजना बनाई। साथ में उदय की पत्नी अंजली व आठ वर्षीय पुत्र भी गए। नैनीताल स्थित होटल में सिर्फ एक कमरे की बुकिंग कराई गई। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत के मुताबिक देर शाम रणधीर ने उदय को खाना लेने के लिए भेज दिया।
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हो रही थी शर्मिंदगी
अंजली ने अपने पुत्र को खेलने के लिए कमरे से बाहर भेजा। कुछ ही देर में उदय कमरे में आ गया तो सामने पत्नी व रणधीर को आपत्तिजनक स्थिति में देखकर आगबबूला हो गया। वहां भी दोनों के बीच नोकझोंक हुई। इसके बाद जब वह यहां लौटे तो उदय ने अंजली को मायके भेज दिया। रणधीरे से बातचीत बंद कर दी, लेकिन अंजली वीडियो काल पर रणधीर से बातचीत करती रही। यह पूरी बात उदय की सास लीला यादव को भी पता चल गई थी, जिस कारण उसे भी शर्मिंदगी हो रही थी।
11 जुलाई को हुई थी संदिग्ध मौत
11 जुलाई को अंजली की मायके में ही संदिग्ध दशा में मौत हो गई थी। बिना पुलिस को सूचना दिए उदय ने इब्राहिमपुर कछार में उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। 23 जुलाई को अंजली की तेरहवीं थीं। उस दौरान उदय ने अपने कुछ करीबियों से बोला था कि जिसकी वजह से उसका परिवार बिखर गया। उसकी पत्नी दुनिया से चली गई, उस रणधीर यादव को एक माह के भीतर मार डालेगा। इसके बाद उसने अपने भाई विजय, पड़ोसी व चचेरे भाई राम सिंह यादव से बात कर पूरी साजिश रची। विजय की दुकान में काम करने वाले नौकर सुजीत श्रीवास्तव को भी शामिल किया। तीन और लोगों की व्यवस्था उदय यादव ने की।
शव की पहचान नहीं होने पर उठे सवाल
22 अगस्त की रात रणधीर गायब हुए। उसी रात गुमशुदगी दर्ज की गई। 23 अगस्त की सुबह बमरौली रेलवे स्टेशन स्थित आउटर पर क्षत-विक्षत अज्ञात युवक का शव मिला। पूरामुफ्ती पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। इस दौरान पुलिस से एक गलती हो गई। इतना हाईप्रोफाइल मामला होने के बाद भी नवाबगंज पुलिस से संपर्क नहीं किया। वजह यह थी कि किसी को यकीन ही नहीं था कि रणधीर यादव की इस तरह हत्या कर लाश को रेलवे लाइन पर फेंक दिया जाएगा। 72 घंटे तक शव की पहचान न होने पर लावारिस में अंत्येष्टि भी कर दी गई।
क्या कहते हैं डीसीपी गंगानगर
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत का कहना है कि लाश इतनी क्षत-विक्षत थी कि उसकी पहचान कर पाना मुश्किल था। राम सिंह व लीला की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि बमरौली रेलवे स्टेशन स्थित आउटर पर मिली लाश रणधीर की थी। मृतक की फोटो व उसके शरीर पर जो कपड़े थे, उसे रणधीर के पिता सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी राम अभिलाख को गुरुवार दोपहर दिखाया गया तो उन्होंने पहचान की।
रो-रो कर बेसुध हुए पत्नी व बच्चे, लोग बांधते रहे ढांढस
संसू, नवाबगंज : पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव की हत्या की खबर ने हथिगहां मोहम्मदपुर गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों को दहला दिया। बड़ी संख्या में लोग रणधीर के घर पहुंच गए। नाते-रिश्तेदारों के साथ ही करीबी एकत्र रहे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि रणधीर की हत्या कर दी गई है। मृतक की पत्नी एवं मौजूदा जिला पंचायत सदस्य बबली यादव अपने पति की याद में बेसुध हो गई थी। बेटा शिवम और बेटियां निधि व विधु की रो-रो कर हालत खराब थी। रणधीर की बहन समेत अन्य स्वजन भी बेहाल थे। लोग पूरे परिवार को ढांढस बांधने में लगे थे।
मिलनसार थे रणधीर यादव
रणधीर यादव काफी मिलनसार थे। यही वजह थी कि पहली ही बार में वर्ष 2013-14 में रणधीर यादव जिला पंचायत सदस्य चुने गए। दूसरी बार महिला सीट हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी बबली यादव को मैदान में उतारा और फिर विजयश्री हासिल की। रणधीर यादव शुरूआती दौर में समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को समर्थन दे दिया था। हालांकि, उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली थी, लेकिन सपा में भी वह नजर नहीं आते थे। जिला पंचायत के चुनाव के बाद वह सपा के किसी कार्यक्रम में नहीं शामिल हुए।
अंजली की मौत की होगी जांच
अंजली यादव की मौत की भी पुलिस जांच करेगी। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत का कहना है कि अंजली की मौत जहर खाने से हुई थी। हालांकि, उस समय पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी और अंतिम संस्कार कर दिया गया था। उसकी हत्या की गई या फिर उसने खुदकुशी की थी, उदय की गिरफ्तारी के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा। हालांकि, गिरफ्तारी उसकी मां लीला से इस बारे में पूछताछ की गई तो वह गोलमोल जवाब देती रही।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
मलाक हरहर के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से इस पूरे प्रकरण से पर्दा उठा। पुलिस को स्कार्पियो चलाते राम सिंह नजर आया। साथ ही उसमें बैठते कई लोग दिखे। यह लोग सीसीटीवी में कई जगह नजर आए। चित्रकूट में सीसीटीवी फुटेज में विजय और सुजीत श्रीवास्तव स्कार्पियो के पीछे बाइक से दिखे, जबकि राम सिंह व उदय स्कार्पियो में नजर आए थे। पुलिस के मुताबिक विजय की एजी आफिस के पास चाय की दुकान चलाता था और सुजीत यही पर नौकर था।
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