Sambhal News : दयाराम बना तौहीद, मकान और दुकान का लालच देकर कराया मातांतरण
संभल में एक गरीब परिवार के बेटे दयाराम को मकान और दुकान का लालच देकर तौहीद अहमद बना दिया गया। परिवार का आरोप है कि नाबालिग उम्र में उसका धर्म परिवर्तन कराया गया। कपड़े की दुकान से शुरू होकर मदरसे तक यह कहानी पहुंची जहाँ उसे धार्मिक शिक्षा दी गई।

संवाद सहयोगी, संभल : गरीब परिवार का बेटा दयाराम आज तौहीद अहमद बन चुका है। स्वजन का आरोप है कि नाबालिग उम्र में उसे मकान और दुकान का लालच देकर मातांतरण की राह पर धकेला गया। कपड़े की दुकान से शुरू हुई यह कहानी मदरसे तक पहुंची, जहां उसे धार्मिक शिक्षा दिलाई गई और पूरी तरह नई पहचान में ढाल दिया गया।
आधार कार्ड तक तौहीद अहमद पुत्र तस्लीम अहमद निवासी दिल्ली के नाम से बनवा दिया गया। दो दशक बाद भी स्वजन दयाराम को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन युवक साफ कहता है कि मैं मजबूर हूं, कुछ बता नहीं सकता।
एक भाई की हो चुकी थी मौत
शहर के मुहल्ला हल्लू सराय निवासी कन्हैया लाल के घर में जन्मा दयाराम, अपने स्वजन के सपनों और उम्मीदों का हिस्सा था। गरीबी थी, लेकिन घर में अपनापन था। वर्ष 2006 में दयाराम 17 वर्ष का था। उसके परिवार में चार भाई और तीन बहनें हैं। जबकि एक भाई की मौत हो चुकी है। दयाराम के बचपन की नासमझ उम्र में ही रोजी-रोटी की तलाश उसे शहर की एक कपड़े की दुकान तक ले आई। दुकान पर काम करते-करते उसके मन को मुस्लिम लोगों ने बदल दिया।
नाबालिग दयाराम को समझ नहीं था कि जिन आवाजों और तर्कों के बीच वह बढ़ रहा है, उनमें एक ब्रेनवाश का महीन खेल भी चल रहा है। उसे धीरे-धीरे यह यकीन दिलाया गया कि उसकी असली पहचान कोई और है। मकान और दुकान के सपने दिखाए गए और उसका मातांतरण कर दिया। सबसे पहले उसका खतना कराया गया और फिर मियां सराय में रखकर उसे वहीं के एक मदरसे में दीनी तालीम दी गई। धीरे-धीरे दयाराम की पहचान पूरी तरह बदल गई।
अब चेहरे पर दाढ़ी और सिर पर माथे टोपी दिखने लगी। नया नाम रखा गया- तौहीद अहमद। नया धर्म और नई पहचान के साथ उसे दिल्ली निवासी तस्लीम अहमद का बेटा दिखाते हुए आधार कार्ड तक बनवा दिया गया।
भाई-बहन बार-बार लौटने की करते रहे कोशिश
दयाराम के भाई बहन बार-बार उसे घर लौटने की कोशिश करते रहे। स्वजन ने मोबाइल नंबर पर बातचीत भी की, लेकिन दूसरी तरफ से आवाज आई- मुझसे इस बारे में कुछ मत पूछो, मुझे मना किया गया है। मैं चाहता हूं कि अपनों के बीच आ सकूं, लेकिन मैं मजबूर हूं।
भारती वर्तमान नाम सिदरा के ताऊ चंद्र प्रकाश ने बताया कि भतीजी को पहले मुस्लिम युवक ने प्रेम जाल में फंसाया और फिर उसका इस तरह ब्रेन वास कर दिया कि वह अपने धर्म को ही भूल गई। इसकी जानकारी जब हमें हुई तो कार्रवाई के लिए संभल कोतवाली पहुंचे थे, लेकिन हमारी रिपोर्ट तक नहीं लिखी गई। क्योंकि उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार थी और संभल के विधायक इकबाल महमूद कैबिनेट मंत्री थे।
काफी प्रयासों के बाद किसी माध्यम से हम लोग डीआईजी मुरादाबाद से मिले, तब कहीं हमारी रिपोर्ट लिखी गई। भतीजी को वापस लाने के लिए मुरादाबाद कोर्ट कचहरी के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट तक मुकदमा लड़ा, लेकिन हर जगह निराशा ही मिली। अब उसका जिक्र करना नहीं चाहते और न ही उससे कोई वास्ता है। वर्तमान सरकार से यही चाहते हैं कि अब किसी हिंदू बहन बेटी का मातांतरण न हो।
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