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    यूपी के इन 19 जिलों को सीधे फायदा पहुंचाएगा शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे, जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर भी बड़ा अपडेट

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 06:14 PM (IST)

    शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार होने के बाद शामली में भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। जिलाधिकारी ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी न ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्मक तस्वीर

    अभिषेक कौशिक, शामली। शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद अब शामली में भूमि की खरीद-फरोख्त (जहां से एक्सप्रेस-वे निकलेगा) पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी भी नियुक्त कर दिया है। जल्द ही थ्री-ए की कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद आपत्तियों का निस्तारण होगा।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले से शुरू होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की नेपाल सीमा तक प्रस्तावित 750 किमी लंबे शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड इकोनामिक कारिडोर एक्सप्रेस-वे की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार चुकी है। इस छह लेन एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की रुड़की इकाई को सौंपी गई है।

    यह एक्सप्रेस-वे शामली के थानाभवन ब्लाक के गोगवान जलालपुर और भैंसानी इस्लामपुर गांव से गुजरेगा। इसी क्रम में इन दोनों गांवों में ही भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने आगे की कार्रवाई के लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एडीएम-एफ) सत्येंद्र कुमार सिंह को नियुक्त कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि जल्द ही थ्री-ए की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगे, जिसके तहत गाटा-खसरा की सूची उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद बाद थ्री-डी की कार्रवाई होगी, जिसके बाद यह भूमि भारत सरकार की हो जाएगी। वहीं, मंडल के दो अन्य जिले मुजफ्फरनगर के 35 और सहारनपुर के नौ गांव से एक्सप्रेस-वे गुजरेगा।

    थ्री-जी के बाद मिलेगा मुआवजा
    एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले कई चरण पूरे करने होते हैं। ड्रोन सर्वे के साथ ही डीपीआर तैयार होती है। इसके बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की नियुक्ति और फिर भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जाती है। इसके बाद गाटा-खसरा संख्या ली जाती है। भारत सरकार अपनी भूमि घोषित करती है। इसके बाद थ्री-जी की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसके तहत आपत्तियों का निस्तारण होता है, और फिर मुआवजे का वितरण किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब आठ से दस माह का समय लग जाता है।

    इन जिलों से गुजरेगा, एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा
    पश्चिमी यूपी में बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली। मध्य यूपी में बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ। पूर्वी यूपी में बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर और अन्य जिलों की बात करें तो रामपुर, मुरादाबाद, बरेली, संभल हैं। इसके अलावा शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, लखनऊ-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे, अंबाला-शामली एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इससे दिल्ली, देहरादून और मसूरी तक आवागमन सुगम होगा, वहीं गंगा किनारे बसे ग्रामीण इलाकों और शहरों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।