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    कंपनी में नहीं दी जा रही स्थानीय लोगों को नौकरी, ईपीएफ और ईएसआइसी फंड में भी धांधली, मंत्री बोले- होगी जांच

    By MUKESH CHANDRA SRIVASTAVAEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Fri, 09 Jan 2026 02:16 PM (IST)

    सोनभद्र के रेणुकूट स्थित नि‍जी क्षेत्र की कंपनी में स्थानीय लोगों को नौकरी न मिलने और ईपीएफ-ईएसआईसी फंड में धांधली का आरोप लगाया गया है। नगर पंचायत अध ...और पढ़ें

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    आरोप लगाया गया क‍ि कंपनी में कई तरह की और भी मनमानी की जा रही है। 

    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। रेणुकूट स्थित न‍ि‍जी क्षेत्र की बड़ी कंपनी में स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं दी जा रही है। आरोप लगाया गया क‍ि कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएसआइसी फंड में भी धांधली की जा रही है। यही नहीं कंपनी में कई तरह की और भी मनमानी की जा रही है। इसे लेकर कर्मचारियों वे स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

    इन्हीं समस्याओं को लेकर नगर पंचायत रेनुकूट की अध्यक्ष ममता सिंह, अनिल सिंह, अपना दल एस की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य (महिला माेर्चा) प्रीति सिंह के नेतृत्व में दर्जनों श्रमिक शुक्रवार को यहां सर्किट हाउस में पहुंच गए। यहां पर स्टांप एवं पंजीयन शुक्ल व सोनभद्र के जिला प्रभारी मंत्री रवीन्द्र जायसवाल से मुलाकात की और 12 सूत्रीय मांग पर भी सौंपा।

    इस पर मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि हरहाल में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के तौर पर योग्यता के अधार पर नौकरी दी जाए। साथ ही ईएसआइसी एवं ईपीएफओ में भी कोई गड़बड़ी नहीं हो। इस मामले में मंत्री जांच के निर्देश दिए।

    लोगों का कहना है कि संस्थान में लगभग बारह हजार कर्मचारी कार्य करते हैं, जिसमें सर्वाधिक संख्या लगभग सात हजार संविदा श्रमिकों की है अर्थात पूरा कारखाना संविदा श्रमिकों द्वारा संचालित हो रहा है। संविदा श्रमिकों से परमानेन्ट नेचर के जाब पर कम पैसों पर काम करवाया जा रहा है।

    कारखाने में सभी मशीनों के कार्य स्थल पर काम करवाने के बाद भी संविदा श्रमिकों के साथ भेद-भाव किया जाता है, कारखाने द्वारा प्रदत्त वेनत भुगतान, बोनस, अर्जित अवकाश-मेडिकल अवकाश, इत्यादि परमानेंट श्रमिक को ज्यादा तथा संविदा श्रमिक को कम प्रदान किया जाता है, जबकि एक ही कारखाना व जाब साइट भी एक ही है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

    उठाई गई मांग

    लोगों द्वारा मांग की गई है क‍ि कारखाने के प्रारंभ से ही सभी कर्मचारियों के लिए त्रिवर्षीय समझौता करके वेतन व अन्य पावनाओं को तय किया जाता रहा है। यह त्रिवर्षीय समझौता समान रूप से संविदा श्रमिकों पर भी लागू था।विगत कुछ वर्षों से भेद-भाव करते हुए संविदा श्रमिकों का समझौता पांच वर्षों से किया जाने लगा जो सवर्था गलत, नियम विरुद्ध, मनमाना, एकतरफा व मजदूरों के हितों के विपरीत व शोषण करने वाला है। इस कारखाने में इंजीनियरिंग बेज बोर्ड की दरें लागू की जानी चाहिए। परमानेन्ट श्रमिकों के बराबर वेतन व अन्य सभी सुविधायें प्रदान की जाए।

    परमानेन्ट श्रमिकों की भांति व बराबर बोनस का भुगतान अवकाश की सुविधा, मेडिकल अवकाश के साथ अन्य सुविधायें व लाभ प्रदान किये जाये। परमानेन्ट श्रमिकों की भांति क्वार्टर एलाटमेन्ट कर रहने की सुविधा प्रदान की जाय। संविदा श्रमिकों का गेटपास एक बार में ही जितने दिन श्रमिक ड्यूटी करता है उत्तने दिन का बनाया जाय। इसके साथ ही लगभग 12 ब‍िंंदुओं को शाम‍िल क‍िया गया है।