Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 71वां राष्ट्रीय अधिवेशन, देशभर से 1500 से अधिक कार्यकर्ता पहुंचेंगे देहरादून

    Updated: Tue, 25 Nov 2025 04:11 PM (IST)

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 71वां राष्ट्रीय अधिवेशन 28 से 30 नवंबर तक देहरादून में होगा। इसमें देशभर से 1500 से अधिक कार्यकर्ता भाग लेंगे। इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। अधिवेशन में यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार कृष्ण पांडेय को दिया जाएगा। रानी आवाक्य को समर्पित प्रदर्शनी में विशेष कलश रखे जाएंगे। 29 नवंबर को शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देश की सांस्कृतिक झलक दिखेगी।

    Hero Image

    परेड ग्राउंड में एबीवीपी के 71 वें राष्‍ट्रीय अधिवेशन के बारे में जानकारी देते एबीवीपी के राष्‍ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ।जागरण

    जागरण संवाददाता, देहरादून: दून के परेड मैदान इस सप्ताह देशभर के युवाओं और शिक्षाविदों का विराट संगम होने जा रहा है। 28 से 30 नवंबर तक यहां स्थापित भगवान बिरसा मुंडा नगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का 71वां राष्ट्रीय अधिवेशन होगा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से 1500 से अधिक प्रतिनिधियों के पहुंचने वाले हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अधिवेशन में शिक्षा, समाज, तकनीक, पर्यावरण, खेल और युवा नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विमर्श किया जाएगा। साथ ही उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्यों के विकास माडल और यहां की आपदाओं से निपटने के स्थायी समाधान पर भी मंथन होगा।

    अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सोलंकी ने मंगलवार को पत्रकारों से वार्ता में बताया कि अधिवेशन में युवाओं में नशे के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंतन करते हुए नशामुक्ति जागरुकता को मजबूत बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

    साथ ही सभी शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को शुद्ध और बिना मिलावट का भोजन उपलब्ध कराने के विषय को भी प्रमुखता से रखा गया है, जो शिक्षा परिसर में स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने बताया कि अधिवेशन के लिए तैयार मुख्य सभागार को भारत के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर समर्पित किया गया है। अधिवेशन से पहले 26 नवंबर को केंद्रीय कार्य समिति और 27 नवंबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठकें भी होंगी।

    परिषद की प्रस्ताव समिति द्वारा तैयार किए गए पांच विशेष प्रस्तावों को इन्हीं बैठकों में अंतिम रूप दिया जाएगा। समापन से एक दिन पूर्व 29 नवंबर को भव्य शोभायात्रा से होगी, जिसमें देश की विविध सांस्कृतिक झलकियां देखने को मिलेंगी।

    उन्होंने बताया कि उद्घाटन सत्र में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस वर्ष का प्रो. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी श्रीकृष्ण पांडेय को प्रदान किया जाएगा।

    30 नवंबर को होने वाले सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहेंगे। अधिवेशन से पहले 26 नवंबर को केंद्रीय कार्य समिति और 27 नवंबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठकें भी होंगी।

    परिषद की प्रस्ताव समिति द्वारा तैयार किए गए पांच विशेष प्रस्तावों को इन्हीं बैठकों में अंतिम रूप दिया जाएगा। कार्यक्रम का समापन 29 नवंबर की भव्य शोभायात्रा से होगा, जिसमें देश की विविध सांस्कृतिक झलकियां देखने को मिलेंगी। प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हर्ष अत्री, राष्ट्रीय मंत्री शमा शर्मा, प्रांत मंत्री ऋषभ रावत आदि उपस्थित रहे।

    मुख्य सभागार जनरल बिपिन रावत को समर्पित

    मुख्य सभागार को भारत के प्रथम चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के नाम पर समर्पित किया गया है। आयोजकों ने कहा कि यह कदम युवाओं में राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी की भावना को प्रज्वलित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    प्रदर्शनी होगी खास

    अधिवेशन के प्रमुख आकर्षणों में से एक 27 नवंबर से शुरू होने वाली महारानी अब्बक्का प्रदर्शनी है। इसमें अभाविप की विचारधारा, संगठन के राष्ट्रीय–राज्य स्तरीय अभियान, स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक, संस्कृति पुनर्जागरण की विभूतियां और विशेष रूप से रानी अब्बक्का की वीरता को प्रेरक और प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन आचार्य बालकृष्ण करेंगे।

    तीन ऐतिहासिक यात्राओं का संगम

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में इस बार तीन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक–आध्यात्मिक यात्राओं का अद्वितीय संगम देखने को मिलेगा। रानी अब्बक्का कलश यात्रा, भगवान बिरसा मुंडा संदेश यात्रा और गुरु तेग बहादुर बलिदान जल यात्रा।

    ये तीनों यात्राएं भारत की विविध सांस्कृतिक धारा और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को नई शक्ति देंगी। कर्नाटक की वीरांगना रानी अब्बक्का की जन्मस्थली उजरे से उठाया गया माटी कलश इस यात्रा का मुख्य केंद्र है।

    रानी अब्बक्का की 500वीं जयंती पर निकली यह यात्रा नारी शक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण के संदेश को लेकर विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए दून पहुंचेगी। यह कलश युवाओं में साहस, स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का भाव जगाएगा। झारखंड के उलिहातु से निकली भगवान बिरसा मुंडा संदेश यात्रा अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ रही है।

    भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलिहातु से लाया गया माटी कलश आदिवासी समाज की अस्मिता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उनकी 150वीं जयंती पर निकली यह यात्रा देश को विविधता में निहित एकता की याद दिलाती है।

    गुरु तेग बहादुर बलिदान जल यात्रा भारत की आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का अनुपम प्रतीक है। दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब से लाया जा रहा यह पवित्र जल गुरु तेग बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान की स्मृति को समर्पित है। यह जल न केवल आध्यात्मिक पवित्रता का प्रतीक है, बल्कि इस संदेश का वाहक भी है कि भारत की आत्मा सहिष्णुता, त्याग और सबके लिए स्वतंत्रता में बसती है।

    भगवान बिरसा मुंडा नगर में इन तीनों यात्राओं का एक साथ आगमन राष्ट्रीय अधिवेशन को विशेष बनाएगा और पूरे देश में सांस्कृतिक एकात्मता, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय अखंडता का सशक्त संदेश प्रसारित करेगा।