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    हरिद्वार भगदड़ के बाद नीलकंठ में सतर्क रही पुलिस, लगाई गई अतिरिक्त फोर्स

    हरिद्वार में भगदड़ के बाद नीलकंठ महादेव मंदिर में पुलिस सतर्क रही। सावन के सोमवार को लगभग साढ़े चार लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। पुलिस ने श्रद्धालुओं को कतार में रखने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग किया। मंदिर में जगह की कमी को देखते हुए श्राइन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी पहले रखा गया था।

    By deepak semwal Edited By: Nitesh Srivastava Updated: Mon, 28 Jul 2025 07:28 PM (IST)
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    नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन के सोमवार को जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालु। पुलिस

    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर मार्ग पर हुई भगदड़ की घटना के बाद नीलकंठ महादेव मंदिर में पुलिस सतर्क रही। पब्लिक एड्रस सिस्टम (सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली) के जरिए पुलिस श्रद्धालुओं को कतार में खड़े होने और मौसम का अपडेट देती रही।

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    सावन माह का सोमवार होने के कारण आसपास क्षेत्र के साथ ही दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे। शाम चार बजे तक करीब 4.50 लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

    नीलकंठ महादेव मंदिर में आम दिनों में औसतन आठ हजार श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा और सावन महीने के सोमवार को यह संख्या बढ़ जाती है।

    इस साल ग्यारह से 23 जुलाई तक चली कांवड़ यात्रा में करीब साठ लाख श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। सावन माह का सोमवार होने के कारण सुबह से ही जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे थे।

    आसपास क्षेत्र के लोगों के साथ ही दूसरे राज्यों से भी शिवभक्त जलाभिषेक के लिए आए। रविवार को हरिद्वार में मनसा देवी मार्ग पर हुई भगदड़ के बाद नीलकंठ में पुलिस ने सोमवार को सतर्कता बरती। थानाध्यक्ष लक्ष्मणझूला संतोष पैथवाल रविवार शाम से नीलकंठ में ही कैंप किए हुए हैं। सोमवार को पंचायत चुनाव के लिए मतदान भी था।

    इससे आसपास के थानों से कुछ अतिरिक्त फोर्स को नीलकंठ भेजा गया। मंदिर में जलाभिषेक के लिए करीब आठ सौ मीटर तक कतार रही। पुलिस एक-एक कर श्रद्धालुओं को अंदर भेजती रही। पब्लिक एड्रस सिस्टम के जरिए लोगों को कतार में खड़े रहने और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने को कहा गया।

    क्षेत्र में लगातार मौसम भी बदलता रहा। मौसम संबंधी अपडेट भी दिए जाते रहे। मौसम के मिजाज को देखते हुए अधिकांश श्रद्धालु जलाभिषेक करने के बाद नीलकंठ से निकल गए।

    कांवड़ यात्रा के दौरान पैदल मार्ग पर भी भीड़ थी। सोमवार को नीलकंठ आने वाले अधिकांश लोग वाहनों से पहुंचे। थानाध्यक्ष पैथवाल ने बताया कि सोमवार को शाम चार बजे तक करीब साढ़े चार लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया था।

    प्रांगण में जगह कम, एक समय में क्षमता से तीन गुना तक अधिक रहती है भीड़

    नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रांगण में जगह बेहद कम है। एक समय में यहां करीब पंद्रह सौ श्रद्धालुओं के लिए जगह है। लेकिन इससे तीन गुना तक श्रद्धालु यहां रहते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आठ सौ मीटर तक कतार लगती है। एक बार में तीन कतार लगाई जाती है।

    आसपास क्षेत्र में अतिक्रमण भी समस्या रहा है। साल 2014 में यहां की व्यवस्था श्राइन बोर्ड बनाकर करने की बात उठी थी। तत्कालीन सचिव धर्मस्व डा. उमाकांत पंवार ने जिलाधिकारी पौड़ी को नीलकंठ में श्रइन बोर्ड के गठन के लिए क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों, ग्रामीणों व मंदिर समिति के साथ बैठक कर सुझाव आमंत्रित करने को कहा था।

    तब लक्ष्मण झूला स्थित डीएम कैंप कार्यालय में आम बैठक भी बुलाई गई। जिसमें लोगों का कहना था कि नीलकंठ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन आदि के लिए श्राइन बोर्ड बनाने की बात कही थी। हालांकि, इस प्रस्ताव का उसके बाद पता नहीं चल पाया।