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    स्कूली बच्चों के साथ आमजन भी पढ़ेंगे ग्वेल देवता के न्याय और श्रीनंदा राजजात के चमत्‍कार, उत्‍तराखंड शासन को भेजा प्रस्‍ताव

    Uttarakhand News उत्तराखंड की विरासत और विभूतियों से परिचित कराने वाली पुस्तक हमारी विरासत व विभूतियां अब आमजन के लिए भी उपलब्ध होगी । एससीईआरटी द्वारा तैयार यह पुस्तक जिसमें राज्य के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का वर्णन है सार्वजनिक पुस्तकालयों और अन्य स्थानों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

    By Ashok Kumar Edited By: Nirmala Bohra Updated: Wed, 30 Jul 2025 01:03 PM (IST)
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    अभी तक कक्षा छह से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं पाठ्य पुस्तकें.Concept

    अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून। ग्वेल देवता का न्याय और श्रीनंदा राजजात के इतिहास के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के ऐतिहासिक, पौराणिक व पुरातात्विक महत्व के स्थलों, मेलों व अन्य आयोजनों की जानकारी स्कूली बच्चों के साथ आमजन को भी सुलभ होगी।

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    स्कूली पाठ्यक्रम में नई सम्मिलित की गई ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ पुस्तक में राज्य की लोक और सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत को लिया गया है। विशेष यह है कि इन पुस्तकों को सार्वजनिक पुस्तकालयों, ग्राम पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों और पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए एससीईआरटी शासन को प्रस्ताव भेजा रही है।

    पाठ्य पुस्तक लागू

    प्रदेश में इस समय कक्षा छह, सात और आठ में हमारी विरासत व विभूतियां पाठ्य पुस्तक लागू की गई है। इसमें उत्तराखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा सामाजिक विरासत के साथ-साथ राज्य की महान विभूतियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों और अन्य प्रेरणास्पद व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया है।

    उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके और प्रदेश के गौरवशाली अतीत को समझ सके। किताबें अभी सिर्फ स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। ये बाजार में उपलब्ध नहीं है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने इस पुस्तक को तैयार किया था। साहित्य प्रेमी और पाठक अब इन पुस्तकों को आमजन को उपलब्ध कराने के लिए परिषद के समक्ष पैरवी कर रहे हैं।

    इसे देखते हुए एससीईआरटी इन पुस्तकों को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि राज्य की गौरवगाथा से सभी लोग परिचित हो सकें। प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति को भी इस विषय में लगातार आमजन के सुझाव और अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।

    कक्षा छह की पुस्तक का प्रत्येक अध्याय ज्ञानवर्धक

    कक्षा-छह की पाठ्य पुस्तक ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ में श्रीबदरीनाथ, अनोखा सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत, न्यायकारी ग्वेल देवता, समाज शिल्पी खुशीराम आर्य, विश्व धरोहर रम्माण, वीरांगना तीलू रौतेली, वीर योद्धा माधो सिंह भंडारी सहित 24 अध्याय हैं।

    कक्षा सात में इन योद्धाओं का परिचय

    कक्षा-सात में कहानी पंचकेदार की, कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे, श्रीनंदा राजजात, कत्यूर राजमाता जिया रानी, उत्तराखंड राज्य आंदोलन : खटीमा और मसूरी गोलीकांड, शहीद मेजर राजेश अधिकारी, चौंदकोट जनशक्ति मार्ग की गौरव गाथा सहित 27 पाठ विषय सूची का हिस्सा हैं।

    आठवीं में पंचप्रयाग से प्रारंभ होती है पुस्तक

    आठवीं कक्षा की पुस्तक में पंचप्रयाग के अलावा अमर सेनानी जयवंत सिंह रावत, बिस्सू मेला, कारगिल में किया कमाल, (18वीं गढ़वाल राइफल की शानदार शौर्य गाथा) हमारे आभूषण, गंगोत्री गर्ब्याल, उत्तराखंड में राम धाम, जुझारू विपिन त्रिपाठी, गौचर मेला सहित 27 पाठ सम्मिलित किए गए हैं।

    ‘एससीईआरटी की ओर से कक्षा छह से आठवीं तक पाठ्यक्रम के अंतर्गत ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ पुस्तक लागू की गई है। पुस्तकों को लेकर आमजन में भी बहुत अधिक जिज्ञासा है। राज्य के इतिहास और विभूतियों से आमजन भी परिचित होना चाहता है। इसलिए पुस्तक को आमजन तक पहुंचाने के दृष्टिगत प्रस्ताव शिक्षा मंत्री डा.धन सिंह रावत के संज्ञान में लाया जा रहा है।’ - सुनील कुमार भट्ट, एससीईआरटी दस्तावेज समिति के पीठासीन अधिकारी