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    Uttarakhand: कक्षा एक में न्यूनतम आयु का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता होगी रद, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 02:59 AM (IST)

    उत्तराखंड सरकार ने कक्षा एक में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार यह आयु छह वर्ष निर्धारित है जो शैक्षणिक सत्र के एक जुलाई से पहले पूरी होनी चाहिए। प्री-स्कूलों (नर्सरी एलकेजी यूकेजी) के लिए भी आयु सीमा तय की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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    कक्षा एक में न्यूनतम आयु का उल्लंघन हुआ तो नपेंगे विद्यालय। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश सरकार ने कक्षा एक में प्रवेश के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 एवं उत्तराखंड फ्री और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के अनुसार कक्षा एक में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित की गई है।

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    यह आयु शैक्षणिक सत्र के एक जुलाई से पूर्व पूरी होनी चाहिए।  सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्री-स्कूल की विभिन्न कक्षाओं (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी) के लिए भी आयु सीमा तय है। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन वर्ष, एलकेजी के लिए चार वर्ष और यूकेजी के लिए पांच वर्ष पूर्ण होना आवश्यक है।

    लेकिन, संज्ञान में आया है कि कुछ विद्यालय इन मानकों की अनदेखी कर समय से पहले बच्चों को कक्षा एक में दाखिला दे रहे हैं। इससे न केवल बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव बढ़ता है बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

    सचिव शिक्षा रविनाथ रामन ने आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आयु मानकों का सख्ती से अनुपालन कराया जाए। जो विद्यालय इन नियमों की अवहेलना कर रहे हैं, उनकी मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी और इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजे जाएं।

    शासन का कहना है कि बच्चों को आयु अनुकूल कक्षा में ही प्रवेश दिलाना अनिवार्य है। आदेश का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर अब कठोर कार्रवाई की जाएगी।