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    विदेशी फूल से महकेगा पहाड़, बढ़ेगी आय, अल्मोड़ा में आठ हजार पौधों का ट्रायल गार्डन तैयार

    By Prashant MishraEdited By:
    Updated: Thu, 18 Feb 2021 08:25 PM (IST)

    गोंडा अलीगढ़ (उप्र) व टांडाहेड़ी झज्जर (हरियाणा) में विदेशी पुष्प की खेती पर प्रयोग सफल रहने के बाद हवालबाग (अल्मोड़ा) में राज्य का पहला ट्रायल गार्डन तैयार कर लिया गया है। एक हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में आठ हजार पौधे लगाए जा रहे हैं।

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    हालैंड के साथ ही इटली, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, टर्की आदि देशों में जिप्सोफिला की खेती खूब होती है।

    अल्मोड़ा, डीके जोशी। यूरोपीय देशों का बहुपयोगी जिप्सोफिला फूल अब उत्तराखंड में भी महकेगा। गोंडा, अलीगढ़ (उप्र) व टांडाहेड़ी, झज्जर (हरियाणा) में विदेशी पुष्प की खेती पर प्रयोग सफल रहने के बाद हवालबाग (अल्मोड़ा) में राज्य का पहला ट्रायल गार्डन तैयार कर लिया गया है। एक हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में आठ हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रयोग सफल रहने के बाद उद्यान विशेषज्ञ रकबा बढ़ाएंगे। किसानों को प्रेरित करेंगे ताकि उनकी आर्थिकी मजबूत की जा सके।

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    हालैंड के साथ ही इटली, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, टर्की आदि देशों में जिप्सोफिला की खेती खूब होती है। वीवीआइपी या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सजावट इन्हीं फूलों से होती है। वहां फूलों की कीमत भी अच्छी है। तीन वर्ष पूर्व अलीगढ़ के गौंडा ब्लाक व बाद में झज्जर के टांडाहेड़ी गांव में जिप्सोफिला की खेती शुरू की गई थी। टांडाहेड़ी से बहुरंगी पुष्प गाजीपुर फूल मंडी में बेचे जाने लगे हें। हिमालयी राज्य की आबोहवा के माकूल पाए जाने के बाद उद्यान विभाग ने अल्मोड़ा में इसकी खेती के लिए कदम बढ़ाए हैं।

    150 से 200 रुपये का बंच

    जिप्सोफिला फूल तीन माह में तैयार हो जाता है। टपक सिंचाई का बंदोबस्त हो तो इसकी खेती पानी व खाद दोनों बचाती है। एक बंच 150 से 200 रुपये तक बिकता है। अध्ययन के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में एक एकड़ क्षेत्रफल में जिप्सोफिला फूल करीब 10 लाख रुपये तक आय दे सकता है। पौधे की उम्र दो वर्ष तक होती है।

    एक फूल के कई लाभ

    यूरोपीय देशों में तो राष्टï्राध्यक्ष व प्रधानमंत्री आदि को इसी के बुके बनाकर भेंट किए जाते हैं। इस फूल से हर्बल साबुन व शैंपू बनते हैं। फोटोग्राफिक फिल्म निर्माण में भी इस्तेमाल होते हैं।

    एसएसजे परिसर की पूर्व वनस्पति विज्ञानी ने बताया कि जिप्सोफिला का पौधा 50 से 150 सेमी तक ऊंचा होता है। दुनिया में इसकी 150 प्रजातियां हैं। इसकी खूबी है कि अन्य फूलों की तुलना में यह कम सिंचाई में हो जाता है।  मुख्य उद्यान अधिकारी त्रिलोकनाथ पांडेय ने बताया कि जरबेरा, ग्लेडियोलाई, गैंदा, लिलियम व केल के बाद अब पहाड़ में जिप्सोफिला फूल की खेती पर अभिनव प्रयोग करने जा रहे हैं। खेत तैयार हैं। दिल्ली से आठ हजार पौधे मंगा लिए हैं। इसका मकसद किसानों की आय दूना करना है। सजावटी फूल की विभिन्न राज्यों में काफी मांग है। उम्मीद है किसानों को अच्छा फायदा मिलेगा।

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