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    पहले सील की राशन की दुकान, फ‍िर जिला पूर्ति अधिकारी ने मांगे पांच लाख! पूरे उत्‍तराखंड में मामले की चर्चा

    Updated: Thu, 29 May 2025 03:02 PM (IST)

    रुद्रपुर में एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें एक अधिकारी सील की हुई राशन की दुकान को खुलवाने के लिए कथित तौर पर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा है। यह ऑडियो एक अधिकारी और बिचौलिए के बीच का है। जिला पूर्ति अधिकारी ने ऑडियो को फर्जी बताया है और इससे इनकार किया है। मामला पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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    सील सस्ता गल्ला की दुकान खोलने के लिए पांच लाख की डिमांड। प्रतीकात्‍मक

    जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। जिले में एक आडियो ने इंटरनेट मीडिया पर हड़कंप मचा दिया है। यह आडियो कथित तौर पर एक संभाग स्तर के अधिकारी और एक बिचौलिए के बीच हुई बातचीत का है। जिसमें अधिकारी एक सील सस्ते राशन दुकान को फिर से खुलवाने के लिए पांच लाख की डिमांड कर रहा है।

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    बुधवार को इंटरनेट मीडिया पर एक करीब दो मिनट की आडियो प्रसारित हुई, जिसे काशीपुर के बनवारी लाल नामक व्यक्ति की राशन दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है, जो लंबे समय से सील पड़ी है।

    जिसमें एक बिचौलिया अधिकारी से सील की हुई बनवारी लाल की दुकान खोलने के एवज में दिवाली उपहार के नाम पर पांच लाख रुपए की डिमांड कर रहा है। यह राशि अधिकारी अपने घर मंगा रहा है। कई बार बिचौलिया स्थिति न होने का हवाला दे रहा है, लेकिन अधिकारी सुनने को राजी नहीं।

    मामले में ऊधम सिंह नगर के जिला पूर्ति अधिकारी विपिन कुमार का कहना है कि यह आडियो उनका नहीं है और उनका इससे कोई लेना देना नहीं है। मामला न केवल ऊधम सिंह नगर बल्कि पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बन गया है।

    आडियो में ये हो रही बातें

    • बिचौलिया : जय हिंद, सर। आपकी कृपा है। मैं काशीपुर में हूं। बनवारी लाल का काम करवा दीजिए।
    • अधिकारी : जय हिंद। बनवारी लाल का? तू पहले दिवाली ले आ।
    • बिचौलिया : सर, मैं सोमवार को आता हूं।
    • अधिकारी : कल आ जा। बनवारी को बोल दे, दिवाली ले आए।
    • बिचौलिया : सर, काम करवा दीजिए, दिवाली करवा दूंगा।
    • अधिकारी : जब दिवाली लेगा, तभी काम होगा।
    • बिचौलिया : कितने बोलते हैं, सर?
    • अधिकारी : पांच।
    • बिचौलिया : पांच हजार?
    • अधिकारी : नहीं बेटा, पांच लाख।
    • बिचौलिया : इतने तो उसके बाप की प्रापर्टी में भी नहीं होंगे!
    • अधिकारी : क्यों नहीं है?