प्रदोष व्रत हर महीने दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। हिंदू धार्मिक दृष्टि से यह व्रत काफी मायने रखता है। इससे आपके जीवन में खुशहाली आ सकती है।
आज हम आपको एक ऐसे पाठ के बारे में बताएंगे, जिसे प्रदोष व्रत पर करने से आपके अच्छे दिन आ सकते हैं। आइए इस पाठ के बारे में विस्तार से जानें।
आपको प्रदोष व्रत पर श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिए। इससे आपकी तरक्की हो सकती है और आपके बिगड़े काम भी बन सकते हैं।
शिवहरे शिवराम सखे प्रभो,त्रिविधताप-निवारण हे विभो। अज जनेश्वर यादव पाहि मां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥1॥
कमल लोचन राम दयानिधे,हर गुरो गजरक्षक गोपते। शिवतनो भव शङ्कर पाहिमां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥2॥
स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर,भजति तं पुरुषं परं पदम्। भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं,शिवहरे विजयं कुरू मे वरम्॥3॥
जय युधिष्ठिर-वल्लभ भूपते,जय जयार्जित-पुण्यपयोनिधे। जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तुते,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥4॥
भवविमोचन माधव मापते,सुकवि-मानस हंस शिवारते। जनक जारत माधव रक्षमां,शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥5॥
प्रदोष व्रत पर आपको श्री शिवरामाष्टकस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिए। अध्यात्म से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें jagran.com