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    'बेहद शर्मनाक', ट्रंप को नोबेल मेडल देने पर मचा बवाल; मचाडो के कदम पर उठे सवाल

    Updated: Fri, 16 Jan 2026 09:16 PM (IST)

    वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल सौंपा। उन्होंने इसे ट्रंप की 'आजादी के लिए प्रतिबद्धत ...और पढ़ें

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    ट्रंप को नोबेल मेडल देने पर मचा बवाल मचाडो के कदम पर उठे सवाल (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल सौंप दिया। मचाडो ने इसे आजादी के लिए ट्रंप की भूमिका का सम्मान बताया। लेकिन इस कदम पर नोबेल समिति, नॉर्वे के नेताओं और सोशल मीडिया पर तीखी नाराजगी देखने को मिली।

    मारिया कोरिना मचाडो गुरुवार को व्हाइट हाउस में डोनल्ड ट्रंप से मिलीं। इस दौरान उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को दिया। मचाडो ने कहा कि यह उनकी तरफ से ट्रंप की“हमारी आजादी के लिए खास प्रतिबद्धता की पहचान है।

    बाद में फॉक्स न्यूज से बात करते हुए मचाडो ने कहा कि ट्रंप इस सम्मान के हकदार हैं और यह उनके लिए भावुक पल था। वहीं ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मचाडो मेडल उनके पास छोड़ गई हैं और इसे उन्होंने आपसीसम्मान का शानदार इशारा बताया।

    नोबेल समिति ने क्या कहा

    नोबेल समिति ने इस घटना के बाद तुरंत साफ कर दिया कि नोबेल शांति पुरस्कार को न तो किसी और को दिया जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है। नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के मुताबिक, यह नियम अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत और नोबेल फाउंडेशन के नियमों का हिस्सा है।

    समिति ने बताया कि कोई भी विजेता चाहे तो मेडल या पुरस्कार की रकम का क्या करना है, यह खुद तय कर सकता है। लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार पाने का सम्मान सिर्फ उसी व्यक्ति का होता है जिसे यह दिया गया है और वहहमेशा उसी के नाम रहता है।

    इसका मतलब साफ है कि मचाडो ही 2025 की आधिकारिक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं। ट्रंप के पास मेडल हो सकता है, लेकिन वह नोबेल पुरस्कार विजेता नहीं बन जाते।

    मचाडो को क्यों मिला था नोबेल

    मारिया कोरिना मचाडो को पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। उन्हें यह सम्मान वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को आगे बढ़ाने और देश को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर ले जाने की कोशिशों के लिए मिला।

    अक्टूबर 2025 में पुरस्कार की घोषणा के वक्त मचाडो ने इसे वेनेजुएला की जनता को समर्पित किया था। उन्होंने उस समय डोनाल्ड ट्रंप की भी तारीफ की थी और कहा था कि उन्होंने वेनेजुएला के लोकतांत्रिक आंदोलन का समर्थन किया। अब उसी कड़ी में उन्होंने ट्रंप को मेडल सौंपा, जिसे कई लोग प्रतीकात्मक कदम बता रहे हैं।

    नॉर्वे में कड़ी प्रतिक्रिया

    नॉर्वे में इस घटना पर गहरा झटका और गुस्सा देखा गया। नॉर्वे की संसद के सदस्य ट्रिग्वे स्लाग्सवोल्ड वेडुम ने कहा कि ट्रंप का मेडल स्वीकार करना दिखाता है कि वह दूसरों के काम और पुरस्कारों से खुद को सजाना चाहते हैं। पूर्व नेता और प्रोफेसर यान्ने हालांड माटलारी ने इसे पूरी तरह अनसुना करार दिया। उन्होंने कहा कि आप किसी पुरस्कार को दे ही नहीं सकते, इसलिए यह कदम बेकार और शर्मनाक है।

    नॉर्वेजियन पीपुल्स एड के महासचिव रेमंड योहानसन ने इसे “बेहद शर्मनाक” बताया और कहा कि इससे नोबेल शांति पुरस्कार की साख को नुकसान पहुंचता है।

    सोशल मीडिया पर तीखी बहस

    सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। रूस में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल मैकफॉल ने लिखा कि उन्हें समझ नहीं आता कि ट्रंप किसी और का पुरस्कार स्वीकार करते समय शर्म क्यों नहीं महसूस करते।

    कई यूजर्स ने लिखा कि अगर नोबेल शांति पुरस्कार किसी को यूं दिया जा सकता है, तो यह पुरस्कार नहीं बल्कि मजाक बन जाता है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मचाडो ट्रंप का समर्थन खरीदने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि कुछ यूजर्स ने मचाडो का बचाव भी किया और कहा कि यह सिर्फ एक मेडल है और शायद इससे वेनेजुएला के लोगों को कुछ राहत मिल सके।