इंफोसिस सीईओ ने कर्मचारी की 'निर्वासन' अफवाहों को किया खारिज, कहा- अमेरिका में प्रवेश ही नहीं दिया गया था
इंफोसिस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सलिल पारेख ने बुधवार को कंपनी की तीसरी तिमाही की आय कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान स्पष्ट किया कि कोई भी इंफोसिस कर्मचा ...और पढ़ें

इंफोसिस सीईओ ने कर्मचारी की 'निर्वासन' अफवाहों को किया खारिज (फोटो- रॉयटर)
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। इंफोसिस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सलिल पारेख ने बुधवार को कंपनी की तीसरी तिमाही की आय कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान स्पष्ट किया कि कोई भी इंफोसिस कर्मचारी अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तनद्वारा हिरासत में नहीं लिया गया या निर्वासित नहीं किया गया।
उन्होंने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को गलत बताते हुए कहा कि कुछ महीने पहले एक कर्मचारी को अमेरिका में प्रवेश से इनकार कर दिया गया था और उसे भारत वापस भेज दिया गया था, लेकिन इसमें कोई हिरासत या जेल जैसी घटना नहीं थी।
13 जनवरी को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि मैसूर स्थित इंफोसिस के एक कर्मचारी को ऑन-साइट प्रोजेक्ट के दौरान ICE एजेंटों ने पकड़ लिया, उन्हें दो घंटे में सामान पैक करने को कहा और जेल या निर्वासन में से एक विकल्प दिया।
पोस्ट में आगे आरोप लगाया गया कि कर्मचारी को फ्रैंकफर्ट और बेंगलुरु की उड़ानों के दौरान एस्कॉर्ट किया गया, सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा और कंपनी के वकील बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मौजूद थे, साथ ही इंफोसिस अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की योजना बना रही है।
पारेख ने इन सभी दावों को स्पष्ट रूप से गलत करार दिया और कहा, "कोई इंफोसिस कर्मचारी किसी अमेरिकी प्राधिकरण द्वारा हिरासत में नहीं लिया गया। कुछ महीने पहले एक कर्मचारी को अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया गया और उसे भारत वापस भेज दिया गया।" उन्होंने ऑनलाइन फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि ये दावे गलत हैं।
यह घटना भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका में H-1B वीजा नियमों की सख्ती के बीच आई है, जिसमें उच्च शुल्क, सोशल मीडिया जांच और लंबी प्रक्रिया शामिल हैं, जिससे ऑन-साइट डिप्लॉयमेंट प्रभावित हो रहा है।
इस बीच, अमेरिकी ICE की हिरासत में मौतों का सिलसिला भी सुर्खियों में है। एजेंसी के अनुसार, 2026 के पहले 10 दिनों में ही चार प्रवासियों की हिरासत में मौत हो गई, जबकि 2025 में कम से कम 30 मौतें दर्ज की गईं - जो एजेंसी की स्थापना के बाद सबसे अधिक हैं।
7 जनवरी को मिनियापोलिस में एक प्रदर्शनकारी की ICE एजेंट द्वारा गोली मारकर हत्या के बाद एजेंसी की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।इंफोसिस ने इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है और स्पष्ट किया है कि कोई हिरासत की घटना नहीं हुई।

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