समुद्र का 'महाबली' USS अब्राहम लिंकन: हर युद्ध और हमले के लिए तैयार रहने वाला यह जहाज कितना खतरनाक है?
अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर 'USS अब्राहम लिंकन' को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है। यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में पिछले साल के आखिर में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इस दौरान अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने में जुट गया है। अमेरिकी नौसेना ने USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 को दक्षिण चीन सागर (South China Sea) से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है।
अमेरिका ने यह फैसला ईरानी एयरस्पेस बंद होने के एक घंटे बाद लिया। USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दक्षिण चीन सागर में तैनात था, लेकिन अब यह मूवमेंट कर रहा है। मिडिल ईस्ट तक पहुंचने में USS अब्राहम लिंकन को एक हफ्ते का समय लग सकता है।
न्यूज नेशन की व्हाइट हाउस संवाददाता केली मेयर ने जानकारी दी कि USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर बढ़ रहा है, जोकि मिडिल ईस्ट, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका, साउथ एशिया और सेंट्रल एशिया के 21 देशों को कवर करता है।

बता दें कि अभी तक अमेरिकी वॉर मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में वेनेलुएला में हमला किया था, उससे वहां भी इस तरह सेना की मौजूदगी बढ़ाई थी।
क्या आपको पता है कि USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना की ताकत की रीढ़ क्यों कहा जाता है?अगर नहीं पता तो कोई बात नहीं आइए हम आपको बताते हैं, पढ़ें ...

अमेरिकी वॉरशिप यूएसएस अब्राहम लिंकन। फोटो-U.S. Navy Photo
क्या है अब्राहम लिंकन?
यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) अमेरिकी नौसेना सबसे शक्तिशाली, हाइली एडवांस्ड और न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक है। यह पिछले 30 साल से ज्यादा समय से अमेरिकी समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है।
नाम यूएसएस अब्राहम लिंकन क्यों?
यूएसएस अब्राहम लिंकन को नवंबर, 1989 में अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था। इसका नाम अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के नाम पर रखा गया है। यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिका की वैश्विक सुरक्षा, सैन्य दबदबे और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता है।
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अमेरिकी वॉरशिप यूएसएस अब्राहम लिंकन। फोटो-U.S. Navy Photo
क्या है इसकी खासियत?
अमेरिकी नौसेना की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के साथ आम तौर पर 3 से 4 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स होते हैं, जो एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन और लैंड-अटैक ऑपरेशन कर सकते हैं। एक क्रूजर भी होता है, जो ऑपरेशंस के दौरान कमांड और कंट्रोल के काम में मददगार होता है।
USS अब्राहम लिंकन के साथ दो न्यूक्लियर अटैक सबमरीन तैनात होती हैं, जोकि दुश्मन के युद्धपोत और पनडुब्बियों को ट्रैक करने के साथ-साथ टोमाहॉक मिसाइलें (वॉरशिप या पनडुब्बी से दागी जा सकने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें) दाग सकती हैं। इस पर 7000-8000 तक सैनिक सवार रहते हैं।
इसके अलावा, लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए एक से दो सपोर्ट जहाज जैसे- ऑयलर और सप्लाई शिप भी साथ चलते हैं। यानी कि अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में एक कैरियर, 3–6 सरफेस वॉरशिप, 1–2 पनडुब्बियां और सपोर्ट शिप साथ चलता है।

कितना खतरनाक है यह बेड़ा?
अमेरिका ने जिस USS अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया है, उसे बेहद खतरनाक माना जाता है। यह सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, समुद्र में चलता-फिरता युद्ध मुख्यालय है। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 इसकी ताकत को कई गुना बढ़ाता है।
यह हवाई, समुद्री और जमीन तीनों पर हमला करने में सक्षम है। इसकी दहशत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कई देश इसे देखकर ही रणनीति बदल देते हैं।
- यह दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हवाई हमला कर सकता है।
- दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर देता है।
- समुद्र से ही हजारों किलोमीटर दूर तक निगरानी कर सकता है।
- पनडुब्बी और समुद्री जहाजों को खोजकर उनका नामोनिशान मिटा सकता है।
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