कैसे होगी भारत-चीन की गहरी दोस्ती? चिनफिंग ने दिए ये 4 सुझाव; पीएम मोदी का आया जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा पर सबकी निगाहें हैं। राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनकी मुलाकात को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों ने आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति चिनफिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए कई सुझाव दिए जिन पर पीएम मोदी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। ये यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनियाभर में ट्रंप के टैरिफ को कोतूहल मचा हुआ है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक को ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ एक राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों ने आपसी विश्वास बढ़ाने पर सहमति जताई है और सीमा पर शांति के महत्व को स्वीकार किया है।
तियानजिन में हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए, जिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रपति शी दिए 4 सुझाव
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "राष्ट्रपति शी ने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए, जिनमें रणनीतिक संचार को मजबूत करना और आपसी विश्वास को गहरा करना, आदान-प्रदान और सहयोग का विस्तार करना, पारस्परिक लाभ और जीत वाले परिणाम प्राप्त करना, एक-दूसरे की चिंताओं को समायोजित करना और अंत में साझा हितों की रक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना शामिल है और इन सभी पर प्रधानमंत्री मोदी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।"
पीएम मोदी ने शांति और सौहार्द पर दिया जोर
मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर और सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "सीमा मुद्दे पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पिछले साल सफल सैन्य वापसी और उसके बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखने पर ध्यान दिया। इस मुद्दे से संबंधित कुछ सिद्धांतों पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर और सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की आवश्यकता को रेखांकित किया।"
मिसरी ने आगे कहा, "मौजूदा तंत्र का उपयोग करते हुए सीमाओं पर शांति बनाए रखने और आगे चलकर समग्र संबंधों में गड़बड़ी से बचने की आवश्यकता पर समझ थी।"
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार पर जोर
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी ने विश्व व्यापार को स्थिर करने के लिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को भी पहचाना और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए एक राजनीतिक और रणनीतिक दिशा से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत-चीन दोनों रणनीतिक स्वायत्तता का पालन करते हैं- पीएम मोदी
मिसरी ने बताया, "प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन दोनों रणनीतिक स्वायत्तता का पालन करते हैं, और उनके संबंधों को तीसरे देश के लेंस के माध्यम से नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों, जैसे आतंकवाद और बहुपक्षीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार का विस्तार करना आवश्यक समझा।
दोनों देशों के बीच सुधर रहे संबंध
बता दें कि पिछले कुछ महीनों में, दोनों देशों ने अपने संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं, जो जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच घातक झड़पों के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे। सात साल के बाद कल शाम चीन पहुंचे पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि पिछले साल अक्टूबर में रूसी शहर कजान में उनकी और शी की मुलाकात के बाद से सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है।
दोनों देश विकास भागीदार हैं न कि प्रतिद्वंद्वी
विदेश मंत्रालय ने कहा, "दोनों नेताओं ने अक्टूबर में कजान में अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति और स्थिर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने फिर से पुष्टि की कि दोनों देश विकास भागीदार हैं न कि प्रतिद्वंद्वी, और उनके मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए।"
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