PM Modi Japan Visit: पीएम मोदी को तोहफे में मिली दारुमा डॉल, जापान में क्या है इसकी मान्यता?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दो दिवसीय दौरे पर हैं जहाँ वे 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उन्हें जापान की पारंपरिक दारुमा गुड़िया भेंट की गई जो मनोकामना पूर्ति का प्रतीक है। इस गुड़िया में चेहरा होता है हाथ-पैर नहीं। मान्यता है कि लक्ष्य तय करने पर इसकी एक आँख रंगी जाती है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर जापान पहुंचे हैं। यहां वह 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान पीएम मोदी को जापान की पारंपरिक दारुमा गुड़िया भेंट की गई। यह गुड़िया गोल लाल रंग की होती है, जिसमें सिर्फ चेहरा होता है, लेकिन हाथ या पैर नहीं होते।
जापान में इस दारुमा डॉल की काफी मान्यता है। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य को तय करता है या कोई मनोकामना रखता है, तो वह एक दारुमा डॉल रखता है। इसके बाद वह इसके एक आंख पर रंग लगा देता है। जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तो फिर सफलता के प्रतीक के रूप में दूसरी आंख को भी रंग दिया जाता है।
पांचवी शताब्दी के भिक्षु से संबंध
जापान के लगभग हर घर, दुकान और मंदिर में इसे सौभाग्य व मनोकामना पूर्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। दारुमा डॉल को बोधिधर्म के पांचवी शताब्दी के भिक्षु का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने ही जेन बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। कहते हैं कि भिक्षु ने इतने लंबे वक्त तक ध्यान किया कि उनके हाथ और पैर कट गए।
दारुमा डॉल वैसे तो इंद्रधनुषी रंगों में उपलब्ध होती है, लेकिन लाल रंग की मान्यता ज्यादा है। क्योंकि वह भिक्षु अक्सर लाल रंग के वस्त्र ही धारण करते थे। दारुमा डॉल को कागज और गोंद से बनाया जाता है। दारुमा डॉल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे पलट देने पर यह फिर से सीधा हो जाता है।
ये डॉल खोखली, गोल और नीचे से भारी होती है। जापान में इसे सफलता, समस्याओं पर जीत और दुर्भाग्य से उबरने का प्रतीक माना जाता है। जापान में एक कहावत है कि आप चाहें कितनी बार भी असफल हों, लेकिन आप बार-बार उठते हैं। दारुमा डॉल को इससे भी जोड़ कर देखा जाता है।
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