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    'भारत और चीन एकसाथ कर सकते हैं ये काम', जापान में पीएम मोदी के संदेश से ट्रंप को लगेगी मिर्ची

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 07:28 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान में कहा कि चीन के साथ मजबूत संबंध क्षेत्रीय शांति समृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने की बात कही। मोदी ने भारत और चीन के बीच स्थिर संबंधों के महत्व पर जोर दिया।

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    जापान में पीएम मोदी ने बताया भारत-चीन मिलकर क्या कर सकते हैं।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार दोपहर जापान में कहा कि चीन के साथ मजबूत संबंध महत्वपूर्ण हैं और इससे क्षेत्रीय शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी।

    पीएम मोदी दिल्ली और टोक्यो के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं और इस दौरान वे चार कारखानों का दौरा करेंगे, जिनमें से एक ई10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप बना रहा है, जिसे भारत खरीदना चाहता है। इसके अलावा वे रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय से संबंधित समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी करेंगे।

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    शी चिनफिंग को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?

    इसके बाद वे शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए चीन जाएंगे। शंघाई सहयोग संगठन एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें रूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस भी शामिल हैं।

    उन्होंने जापानी मीडिया से कहा, "राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर मैं एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां से तियानजिन जाऊंगा। पिछले वर्ष कजान (रूस में, एससीओ की पिछली बैठक के दौरान) में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति हुई है।"

    उन्होंने कहा, "पृथ्वी के दो सबसे बड़े राष्ट्रों, भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह बहुध्रुवीय एशिया और विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।" उन्होंने इस महीने दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के बाद की गई टिप्पणी को दोहराया।

    शिखर सम्मेल क्यों है महत्वपूर्ण?

    यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत, यूक्रेन पर रूस के युद्ध, गाजा पर इजरायल के युद्ध, और उस देश को निर्यात किए जाने वाले भारतीय माल पर संयुक्त राज्य अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण उत्पन्न वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है।

    विशेष रूप से अमेरिका के इस कदम से दशकों से चले आ रहे भारत-चीन सैन्य तनाव में कमी आई है, क्योंकि दोनों एशियाई देश करों से उत्पन्न होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए संबंधों को पुनः संतुलित कर रहे हैं।

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