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    एक तरफ आलीशान महल, दूसरी तरफ टूटी दीवारों वाला घर... कैसा है ईरान में खुमैनी और रजा पहलवी का घर?

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 08:47 PM (IST)

    ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिसे निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का समर्थन प्राप्त है। यह लेख शाह रजा पहलवी के आलीशान म ...और पढ़ें

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    रजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में मोर्चा खोला हुआ है

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक के शासन से आजादी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। यह आंदोलन बढ़ती महंगाई और आर्थिक मुश्किलों के खिलाफ शुरू हुआ था। ईरान की सुप्रीम लीडरशिप की तरफ से प्रदर्शनकारियों के दमन की कई कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन इस बार का आंदोलनकारी अड़े हुए हैं।

    ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में मोर्चा खोला हुआ है। ईरान में इस्लामिक क्रांति आने के पहले का माहौल काफी अलग था। पश्चिमी सभ्यता से ओत-प्रोत होते तत्कालीन ईरान और आज के ईरान में कितना फर्क है, इसका अंदाजा आप दोनों लीडर के आवास को देखकर लगा सकते हैं।

    दोनों घरों में काफी फर्क

    एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के राजा शाह रजा पहलवी और उन्हें सत्ता से हटाने वाले धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के घर में जमीन-आसमान का अंतर है। रजा पहलवी के घर की छत काफी ऊंची थी, जिसके चारों ओर एक बड़ा बगीचा था। कांच का दरवाजा इतना चौड़ा था कि 4 लोग आराम से कंधे से कंधा मिलाकर अंदर जा सकें। दीवार की ईंट सुनहरे पीले रंग की थी और बाहर की ओर नीले रंग की वॉल पेटिंग बनी थी।

    रिसेप्शन रूम किसी फाइव स्टार होटल के रिसेप्शन जैसा लग रहा था, जो किसी ऑडिटोरियम जितना बड़ा था। मेहमानों को शाह से मिलने से पहले यहीं इंतजार करना होता था। डाइनिंग हॉल की मेज इतनी लंबी थी कि 10 से ज्यादा लोग बैठ सकते थे। प्राइवेट थिएटर, मुलायम व चौड़े सोफे, कांच की मेज पर देश-दुनिया से मिली बेशकीमती सामान और करीब 400 से ज्यादा कार और बाइक इस घर को खास बनाते थे।

    खुमैनी का घर बेहद साधारण

    इसके उलट खुमैनी का घर शहर के किसी आम घर की तरह ही था। गेट पर मेटल प्लेट पर खुमैनी के जीवन और इमारत की जानकारी दर्ज थी। लिविंग रूम में एक सिंगल, आयताकार सोफा था। खुमैनी से लोग यहीं मिलते थै। उनका इस्तेमाल किया एक छाता यहीं कांच की आलमारी में रखा हुआ है। खुमैनी के घर का हॉल किसी मस्जिद के अंदरूनी हिस्से जैसा दिखता था।

    खुमैनी यहीं एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बैठकर बयान देते थे और नीचे जमीन पर खड़े लोगों से बात करते थे। दीवारें फीकी पड़ चुकी हैं और देखकर ऐसा लगता है कि कभी इनकी मरम्मत नहीं की गई है।

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