ईरान पर अमेरिकी हमले रोकने के लिए एकजुट हुए अरब देश? समझिए सऊदी, कतर, ओमान और मिस्र की कूटनीति
मध्य पूर्व में तनाव के बीच, सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी। उनकी कूटनीति के कार ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने एकजुट होकर एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। अरब देशों ने अमेरिका को साफ-साफ चेतावनी दी थी कि ईरान पर किसी भी सैन्य कार्रवाई के विनाशकारी सुरक्षा और आर्थिक परिणाम होंगे, जिसका सीधा असर अमेरिकी हितों पर भी पड़ेगा।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और ओमान ने हमले के खिलाफ वाशिंगटन पर दबाव बनाया था। अरबों देशों की चेतावनी के बाद ट्रंप ने फिलहाल हमले को यह कहते हुए स्थगित कर दिया कि ईरान में हत्याएं कम हो रही हैं।
मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम न छापने की शर्त पर खाड़ी देश के एक अधिकारी ने कहा कि चार अरब देशों ने इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के साथ गहन कूटनीति का संचालन किया ताकि तेहरान द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग को लेकर ईरान पर अमेरिका द्वारा संभावित हमले को रोका जा सके, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि इसका पूरे क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा।
भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
खाड़ी देश के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बोलते हुए अधिकारी ने कहा कि चारों देशों ने वाशिंगटन को यह बता दिया था कि किसी भी हमले के व्यापक क्षेत्र पर सुरक्षा और आर्थिक दोनों दृष्टियों से गंभीर परिणाम होंगे, जो अंततः स्वयं संयुक्त राज्य अमेरिका को भी प्रभावित करेंगे।
अधिकारी ने आगे बताया कि उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर उसके द्वारा किए गए किसी भी जवाबी हमले के तेहरान के क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संबंधों पर गंभीर परिणाम होंगे।
संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर किसी प्रकार की कूटनीति में शामिल होने के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सऊदी अरब के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय, कतर के विदेश मंत्रालय, ओमान के सूचना मंत्रालय और मिस्र के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इस प्रतिक्रिया का तुरंत जवाब नहीं दिया।
खाड़ी देशों को है इस बात का डर
खाड़ी देशों को डर है कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की किसी भी जवाबी कार्रवाई में उनके देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी प्रभावित हो सकते हैं, और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले ऊर्जा संयंत्र भी निशाने पर आ सकते हैं। सऊदी अरब और कतर के ट्रंप प्रशासन के साथ मजबूत संबंध रहे हैं।
कतर और मिस्र दोनों ने गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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