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    क्या होता है पूप सूटकेस? ट्रंप के साथ मीटिंग में पुतिन के बॉडीगार्ड ले गए थे साथ, अब उठ रहे कई सवाल

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई वार्ता के दौरान पुतिन की सुरक्षा में विशेष ध्यान रखा गया। उनके मल-मूत्र को भी अलास्का में नहीं छोड़ा गया जिसके लिए उनके बॉडीगार्ड एक विशेष सूटकेस ले गए थे। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनकी सेहत के बारे में कोई जानकारी उजागर न हो सके।

    By Digital Desk Edited By: Deepak Gupta Updated: Mon, 18 Aug 2025 09:00 PM (IST)
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    ट्रंप के साथ मीटिंग में पुतिन के बॉडीगार्ड ले गए थे पूप सूटकेस

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को अलास्का में वार्ता हुई थी। अमेरिकी क्षेत्र में हुई इस बैठक के दौरान न केवल पुतिन कड़ी सुरक्षा में रहे बल्कि इस बात का भी खास ध्यान रखा गया था कि उनका मल-मूत्र तक अलास्का में न छोड़ा जाए। इसके लिए रूसी राष्ट्रपति के बाडीगार्ड एक विशेष सूटकेस ले गए थे।

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    यह 'पूप सूटकेस' कोई दस्तावेज या हथियार रखने के लिए नहीं, बल्कि मल-मूत्र रखने के लिए था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनकी सेहत के बारे में कोई जानकारी उजागर न होने पाए। मल-मूत्र की जांच से किसी की सेहत के बारे में जानकारी मिल सकती है।

    पुतिन की सुरक्षा के लिए पूप सूटकेस

    एक्सप्रेस यूएस की रिपोर्ट के अनुसार, यह असामान्य सुरक्षा उपाय इसलिए किया गया ताकि कोई विदेशी शक्ति पुतिन के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एकत्र न कर सके। पुतिन जब भी विदेश दौरे पर जाते हैं तो उनके बाडीगार्ड इसी तरह का उपाय करते हैं। वे उनके मल-मूत्र को एकत्र करके रूस लाते हैं। ट्रंप के साथ बैठक के दौरान पुतिन की सुरक्षा के कड़े सुरक्षा उपाय किए गए थे। वह यात्रा के दौरान अपने बाडीगार्डों की सुरक्षा के घेरे में रहे और रूसी खुफिया ने उनकी सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए थे।

    फ्रांस दौरे पर लेकर गए थे पूप सूटकेस

    इस फ्रांसीसी प्रकाशन ने अपनी रिपोर्ट में पत्रकारों रेगिस जेंटे और मिखाइल रुबिन के हवाले से बताया कि रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (एफपीएस) के सदस्य उनके मल समेत अपशिष्ट को एकत्र करने के लिए विशेष बैग ले जाते हैं, जिन्हें सूटकेस में रखा जाता है। इस तरह का उपाय पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है। मई, 2017 में जब वह फ्रांस के दौरे पर गए थे, तब भी ऐसा ही किया गया था।

    बीबीसी की पूर्व पत्रकार फरीदा रुसतामोवा ने बताया कि 1999 में वियना की यात्रा के दौरान भी इसी तरह के उपाय किए गए थे।

    सेहत को लेकर उठ चुके हैं सवाल

    पुतिन की सेहत को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में कजाखस्तान में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान उनके पैरों की हरकत और 2023 में बेलारूस के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान कुर्सी पर पुतिन के झटके लेने जैसी घटनाओं से उनकी सेहत को लेकर तमाम अटकलें लगाई गई थीं। पार्किंसन जैसी बीमारी होने तक का संदेह जताया गया था।

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