विचार: 12 बरस की सफलताएं और विफलताएं
यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि मोदी सरकार अपनी 12 बरस की उपलब्धियों को गिनाते समय इस पर गंभीरता से ध्यान दे कि उसे कुछ विफलताएं भी हाथ लगी हैं, जिनके कारण देश में बेचैनी बढ़ रही है।
HighLights
अनुच्छेद 370 हटाना, राम मंदिर निर्माण, माओवाद का खात्मा।
आधारभूत ढांचे का अभूतपूर्व विकास, डिजिटल लेनदेन में अग्रणी।
शिक्षा, न्याय, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसी चुनौतियां बरकरार।
राजीव सचान। मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे करने जा रही है। यह तय है कि इस अवसर पर उसकी ओर से अपनी उपलब्धियों का बखान किया जाएगा। इसके लिए भाजपा की ओर से एक अभियान चलाया जाने वाला है, जिसमें लोगों को मोदी सरकार की उपलब्धियों के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। निःसंदेह मोदी सरकार के पास अपनी उपलब्धियों के बारे में बताने के लिए बहुत कुछ है और यह हर सरकार का अधिकार है कि वह उनके बारे में जनता को अवगत कराए। यदि मोदी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करें तो उनकी एक लंबी सूची है।
इन उपलब्धियों में कई ऐसे साहसिक फैसले हैं, जिनमें से कुछ के बारे में यह कल्पना करना कठिन था कि कोई सरकार ऐसे फैसले ले पाएगी, जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक करना और फिर आपरेशन सिंदूर। ये दोनों सैन्य अभियान इस मायने में विशेष रहे कि विश्व में पहली बार किसी परमाणु हथियार संपन्न देश ने दूसरे ऐसे ही देश पर हवाई हमले किए। हालांकि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया, लेकिन यदि मोदी सरकार नहीं होती तो शायद यह रास्ता बाधित ही रहता और राम मंदिर का निर्माण आनन-फानन नहीं होता। मोदी सरकार अपने तीसरे कोर एजेंडे समान नागरिक संहिता की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
जीएसटी लागू होना भी इस सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। वैसे तो नोटबंदी भी एक साहसिक फैसला था, लेकिन इसके वैसे सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुए, जैसे अपेक्षित थे। माओवाद का खात्मा भी मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। कुछ वर्षों पहले तक माओवाद का खात्मा असंभव सा दिखता था, पर मोदी सरकार और विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संभव कर दिखाया और वह भी तय समय में। पिछले 12 वर्षों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई है। देश भर में सड़कों का तेजी से निर्माण हुआ है। इसी तरह पुल, बिजलीघर, हवाई अड्डे निर्मित हुए हैं और रेल सुविधाओं का विकास हुआ है।
ग्रामीण विकास की योजनाओं ने भी रफ्तार पकड़ी है। देश में डिजिटलीकरण भी द्रुत गति से हुआ है। इसके चलते भारत डिजिटल लेनदेन के मामले में विश्व में अग्रणी है। विकास के साथ ही प्रभावशाली जनकल्याणकारी योजनाओं की भी एक लंबी सूची है। इन योजनाओं ने आम आदमी का जीवन बदला है। शौचालय निर्माण, उज्ज्वला, आवास, बिजली, आयुष्मान, किसान सम्मान निधि, मुफ्त राशन संबंधी जैसी योजनाओं ने सचमुच लोगों को लाभान्वित किया है। जनधन योजना निर्धन जनता के वित्तीय समावेशन की एक बड़ी मिसाल हैं। इन योजनाओं के चलते करोड़ों लोगों को गरीबी के दायरे से बाहर निकालने में मदद मिली है। मोदी सरकार ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि उसे जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करना आता है। इन 12 वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी बहुत काम हुआ है।
यदि आज भाजपा के नेतृत्व वाली राजग की 22 राज्यों में सरकारें हैं तो इसका एक बड़ा कारण मोदी सरकार की रीति-नीति है। भाजपा कुछ अजेय समझे जाने वाले राज्यों में अपनी सरकार बनाने में सफल रही है। आज विपक्ष के लिए उसका मुकाबला करना कठिन हो रहा है। कोई भी सरकार हो, उसकी प्रत्येक योजना कसौटी पर खरी नहीं उतरती। ऐसा ही मोदी सरकार की कुछ योजनाओं के साथ हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी हैं। किसानों की आय दोगुनी करने का भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। आम तौर पर हर सरकार के समय महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे रहते हैं। मोदी सरकार के लिए भी ये चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
अब जब मोदी सरकार अपने 12 साल की उपलब्धियों का गुणगान करने में जुटने वाली है, तब किसी को उसका ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहिए कि कुछ ऐसे मोर्चों पर उसे विफलता हाथ लगी है, जिनमें उसे सफलता अर्जित करनी चाहिए थी, जैसे शिक्षा और परीक्षाओं की सूरत बदलनी चाहिए थी, लेकिन नई शिक्षा नीति के बाद भी शिक्षा का हाल संतोषजनक नहीं और परीक्षाओं, विशेषरूप से प्रतियोगी परीक्षाओं का हाल तो बहुत ही बुरा है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारें एक ही नाव पर सवार हैं। रह-रहकर प्रश्नपत्र लीक होते रहते हैं। मोदी सरकार की एक बड़ी विफलता न्याय को सुलभ और सुगम न बना पाना है।
लचर न्यायिक तंत्र देश के विकास में एक बड़ी बाधा है। इसी तरह की एक बड़ी बाधा सरकारी कामकाज में व्याप्त भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार लाइलाज हो गया दिखता है। जहां निर्माण वहां तो भ्रष्टाचार है ही, इसके अलावा जहां कहीं भी सरकारी अनुमति, अनुमोदन आदि की आवश्यकता होती है, वहां भी लेन-देन होता है। स्मार्ट सिटी योजना भी कुल मिलाकर नाकाम ही रही और हमारे शहर बेतरतीब विकास की कहानी कहने के साथ विकसित भारत के लक्ष्य का बड़ी बाधा बने हुए हैं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि मोदी सरकार अपनी 12 बरस की उपलब्धियों को गिनाते समय इस पर गंभीरता से ध्यान दे कि उसे कुछ विफलताएं भी हाथ लगी हैं, जिनके कारण देश में बेचैनी बढ़ रही है।
(लेखक दैनिक जागरण में एसोसिएट एडिटर हैं)












