अविनाश चंद्रा। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड कई मायनों में ऐतिहासिक रही, लेकिन कर्तव्य पथ पर सबसे अधिक ध्यान कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की झांकी ने खींचा। इस झांकी ने दुनिया को दिखाया कि भारत का युवा अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता है।

झांकी में प्रदर्शित स्वदेशी हाइब्रिड यूएवी ‘जोल्ट’ और ‘टेथर्ड’ ड्रोन प्रणालियों ने न केवल देश की सैन्य शक्ति को गौरवान्वित किया, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स की उस अदम्य क्षमता का भी लोहा मनवाया, जो पिछले एक दशक में फली-फूली है। गणतंत्र दिवस की परेड में स्टार्टअप्स की इस भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि आत्मनिर्भरता केवल नारा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरता सच है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2026 के पहले ‘मन की बात’ में इन स्टार्टअप्स का विशेष जिक्र करना दर्शाता है कि आने वाला दशक ‘इनोवेशन’ और ‘एंटरप्रेन्योरशिप’ (नवाचार और उद्यमिता) का ही होगा और अब भारत एक ‘फ्यूचर रेडी वर्कफोर्स’ (भविष्य के लिए तैयार कार्यबल) का केंद्र बनने के लिए मजबूती से तैयार है।

नवाचार के ऊंचे मानक

वर्ष 2026 ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान की 10वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। जनवरी 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत की थी, तब लक्ष्य था भारत में नवाचार के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना। 2016 में मुट्ठी भर स्टार्टअप्स से शुरू हुआ यह सफर आज दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स तक पहुंच चुका है। स्टार्टअप्स अब केवल ई-कॉमर्स या सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, वे अब डीप-टेक और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कदम रख चुके हैं।

2024-26 के बीच इस क्षेत्र में सबसे अधिक ‘सूनिकार्न’ (भावी यूनिकॉर्न) देखे गए हैं। गणतंत्र दिवस की झांकी में ‘जोल्ट’ हाइब्रिड यूएवी का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारत के कौशल विकास कार्यक्रमों ने युवाओं को ग्लोबल स्टैंडर्ड का इन्वेंटर बना दिया है। जोल्ट जैसे ड्रोन, जो वर्टिकल टेक-ऑफ और लंबी दूरी की उड़ान भरने में सक्षम हैं, पूरी तरह से भारतीय दिमाग की उपज हैं। इसी प्रकार टेथर्ड ड्रोन प्रणालियां घंटों तक एक ही स्थान पर हवा में रहकर निरंतर डाटा प्राप्त कर सकती हैं, जो सीमाओं की निगरानी के लिए क्रांतिकारी हैं।

आर्थिकी और रोजगार का नया इंजन

संदेश स्पष्ट है कि भारत का स्टार्टअप मिशन अब रोजगार और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षित युवाओं ने स्टार्टअप शुरू किए हैं, जिससे पिछले दशक में 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। इसने नवाचार का लोकतंत्रीकरण भी किया है। अब नवाचार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा; ‘जोल्ट’ जैसी तकनीकों के पीछे टियर-2 और टियर-3 शहरों के प्रतिभावान इंजीनियरों का हाथ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में इस पर विशेष जोर दिया था कि स्टार्टअप अब केवल दिल्ली-बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित नहीं हैं। आज 45% से 50% स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। छोटे शहरों के युवा अब खेती (एग्री-टेक), शिक्षा (एड-टेक) और स्वास्थ्य (हेल्थ-टेक) जैसे क्षेत्रों में तकनीक के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के समाधान खोज रहे हैं।

जोखिम को लेकर बदला नजरिया

भारत आज दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभर चुका है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत की थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मात्र एक दशक के भीतर भारतीय युवा ‘जॉब सीकर’ (नौकरी मांगने वाला) से ‘जॉब क्रिएटर’ (नौकरी देने वाला) बनने की दिशा में इतनी लंबी छलांग लगाएगा। स्टार्टअप इंडिया ने उनमें ‘फेलियर’ (असफलता) के डर को खत्म कर ‘रिस्क’ (जोखिम) लेने के साहस को सम्मान दिया है।

स्टार्टअप इंडिया ने न केवल अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि देश में ऐसी संस्कृति पैदा की है जहां ‘असफलता’ को अंत नहीं, बल्कि सीखने का हिस्सा माना जाता है। इस अभियान की सफलता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि आज देश के लगभग हर जिले से एक स्टार्टअप निकल रहा है। यदि यह गति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी इनोवेशन लैब बनकर उभरेगा।

इन्हें देखकर दंग है दुनिया

भारतीय स्टार्टअप्स के कुछ बेहतरीन नवाचार, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर डाला प्रभाव...

डिजिटल भुगतान क्रांति

भारत आज दुनिया में डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में पहले नंबर पर है और इसका श्रेय पेटीएम, फोन-पे और रेजर-पे जैसे स्टार्टअप्स को जाता है। इन्होंने कैशलेस इकोनॉमी को संभव बनाया। आज एक छोटे रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह क्यूआर कोड के जरिए भुगतान सामान्य बात है।

निजी क्षेत्र की ऊंची उड़ान

रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई स्टार्टअप्स ने भारत का नाम रोशन किया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी राकेट ‘विक्रम-एस’ लांच कर इतिहास रचा। वहीं पिक्सेल नामक स्टार्टअप अत्याधुनिक उपग्रह बना रहा है जो अंतरिक्ष से पृथ्वी की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें और डाटा प्रदान करते हैं।

शिक्षा का लोकतंत्रीकरण

फिजिक्सवाला और बायजूस जैसे स्टार्टअप्स ने ऑनलाइन माध्यम से कोरोना काल में शिक्षा को सुलभ बनाया। यद्यपि बायजूस की छलांग और पतन दोनों ही अब केस स्टडी हैं, परंतु डिजिटल लर्निंग में यह ऐसा मुहावरा बन गया था, जिसने कई एजुकेशनल स्टार्टअप्स की राह प्रशस्त की। डिजिटल लर्निंग घर-घर पहुंची और अब एक छोटे गांव का छात्र भी नाममात्र की फीस पर देश के सबसे अच्छे शिक्षकों से आईआईटी-जेईई या यूपीएससी की तैयारी कर सकता है।

स्वास्थ्य सेवा में सुधार

क्योर.एआई और प्रैक्टो जैसे स्टार्टअप्स ने मेडिकल तकनीक को बदल दिया है। क्योर.एआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके मात्र कुछ सेकेंड में एक्स-रे और सीटी स्कैन से बीमारियों का पता लगा लेता है। वहीं, 1एमजी और फार्मईजी ने दवाइयों की होम डिलीवरी को आसान बनाया।

किसानों के तकनीकी सलाहकार

क्रापइन और देहात (डीहाट) जैसे स्टार्टअप्स किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। ये स्टार्टअप सैटेलाइट डाटा और एआई के जरिए किसानों को बताते हैं कि कब खाद डालनी है, फसल में कौन सा रोग लग सकता है और उन्हें फसल का सही दाम कहां मिलेगा। गरुड़ एयरोस्पेस, वैमानिक एयरोस्पेस और मरुत जैसे स्टार्टअप्स ने ड्रोन को सहायक के रूप में पेश कर भारतीय कृषि क्षेत्र में नई पटकथा लिख दी है।

लॉजिस्टिक्स और क्विक कॉमर्स

डेल्हीवेरी और जेप्टो ने सामान पहुंचाने की गति और सटीकता को नई परिभाषा दी है। बिगबास्केट और ब्लिंकइट जैसे स्टार्टअप्स ने तेज डिलीवरी के जरिए भारतीय ग्राहकों की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है और गिग वर्कर्स को रोजगार। स्टार्टअप्स के इस सेक्टर ने सबसे अधिक ब्लू-कॉलर नौकरियां (डिलीवरी और वेयरहाउसिंग) पैदा की हैं।

(लेखक सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ हैं)