अनिल बलूनी। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण का एक स्पष्ट, पारदर्शी और दूरगामी खाका देश के सामने रखा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में पहली बार संपूर्ण 'वंदे मातरम्' के गायन के साथ राष्ट्र ने अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ करने का नया संकल्प लिया। 2022 के 'पंच प्रण' से आगे बढ़ते हुए अब देश 'सप्तधारा' (सामर्थ्य की सात धारा) के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है, जो भारत की आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 'सप्तधारा' केवल सरकारी नीतियों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक सपनों का प्रकटीकरण है। विकास की सप्तधारा के सात प्रमुख स्तंभ नए भारत की नींव रख रहे हैं।

इनमें पहला है विनिर्माण: 'मेक इन इंडिया', 'स्वदेशी' और 'वोकल फार लोकल' के मंत्र ने जमीनी स्तर पर क्रांति ला दी है। 2014-15 में हमारा इलेक्ट्रानिक उत्पादन लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में करीब छह गुना बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह मोबाइल फोन का उत्पादन 18,000 करोड़ रुपये से 28 गुना बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है। मोबाइल फोन निर्यात में 127 गुना वृद्धि सिद्ध करती है कि भारत अब आयात पर निर्भर नहीं, बल्कि वैश्विक जरूरतों को पूरा करने वाला निर्यातक बन चुका है।

कृषि और खाद्य उत्पादन: हमारे किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सरकार का लक्ष्य किसानों को वैश्विक निर्यात बाजारों से जोड़ना है। 2013-14 में बागवानी उत्पादन 280.7 मिलियन टन था, जो अब 31 प्रतिशत बढ़कर 367.7 मिलियन टन हो गया है। मत्स्य उत्पादन में 104 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो 96 लाख टन से 195 लाख टन तक पहुंच गई है। कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत भोजन की हिस्सेदारी 13.7 से बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गई है। प्रौद्योगिकी और नवाचार: नया भारत नवाचार का भारत है। 2014 से पहले देश में बमुश्किल 350 स्टार्टअप थे, आज 2026 में भारत के पास 2.3 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की फौज है। यूनिकार्न कंपनियों की संख्या चार से बढ़कर 120 से अधिक हो गई है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्टार्टअप्स एक से बढ़कर लगभग 440 हो गए हैं। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 80वें स्थान से छलांग लगाकर 38वें स्थान पर आ गया है। एआइ, 6जी, क्वांटम प्रौद्योगिकी और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिये देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

गति शक्तिः पीएम गति शक्ति योजना के तहत भारत में मल्टीमाडल कनेक्टिविटी का जाल बिछाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 91,287 किमी से 60 प्रतिशत बढ़कर 1,46,000 किमी से अधिक हो गई है। हाई-स्पीड कारिडोर्स का निर्माण 32 गुना बढ़कर 3,052 किमी हो गया है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है। रेलवे का लगभग पूर्ण रूप से विद्युतीकरण किया जा चुका है, जो कभी केवल 20 प्रतिशत तक सीमित था। हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के युग का शंखनाद है। रक्षा शक्ति: भारत रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन रहा है। रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना की वृद्धि हुई है और रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के स्तर को छू चुका है। 'मिशन सुदर्शन चक्र' और हाइपरसोनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों ने हमारी सेना को अजेय बना दिया है। सशस्त्र माओवाद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है और देश के ताने-बाने को तोड़ने वाले वैचारिक (अर्बन) नक्सलियों से निपटने के लिए राष्ट्र पूरी तरह सतर्क है।

हरित और नीली अर्थव्यवस्था: भारत आज जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 76.38 गीगावाट से बढ़कर 288.58 गीगावाट हो गई है। सौर ऊर्जा क्षमता में 59 गुना का भारी उछाल आया है। भारत अब स्थापित नवीकरणीय और सौर क्षमता में विश्व में तीसरे स्थान पर है। 2025 के ऐतिहासिक शांति अधिनियम ने परमाणु ऊर्जा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है। गैस ग्रिड का विस्तार 70 से 700 शहरों तक हो गया है। नीली अर्थव्यवस्था के तहत मत्स्य पालन 142 प्रतिशत बढ़ा है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 1.5 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गई है, जो स्वच्छ भारत के संकल्प को पुष्ट करता है। साफ्ट पावर: भारत के सांस्कृतिक मूल्य आज विश्व के लिए मार्गदर्शक बन रहे हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 31 से बढ़कर 44 हो गई है। 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' आज पूरी दुनिया में मनाया जाता है। 'हील इन इंडिया' और आयुर्वेद ने भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। विदेशी पर्यटकों की आवक में 43 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। वेव्स समिट जैसे आयोजनों ने भारत की रचनात्मक और एनिमेशन/गेमिंग अर्थव्यवस्था को एक साफ्ट पावर के रूप में प्रस्तुत किया है।

(लेखक लोकसभा सदस्य एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं)