संपादकीय: दुष्प्रचार का सहारा
राहुल गांधी ने संविधान और आरएसएस के बीच लड़ाई का आरोप लगाते हुए अनुसूचित जातियों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया।
HighLights
राहुल गांधी ने संविधान और आरएसएस के बीच लड़ाई का आरोप लगाया।
उन्होंने अनुसूचित जातियों पर अत्याचार और भेदभाव का मुद्दा उठाया।
लेख ने राहुल के आरोपों को दुष्प्रचार और अज्ञानता बताया।
लंबे समय से भाजपा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कठघरे में खड़े करते आ रहे राहुल गांधी ने यह कहकर इस संगठन के खिलाफ अपने हमलों को नए सिरे से धार देने की ही कोशिश की कि देश में संविधान और आरएसएस के बीच लड़ाई है। राहुल गांधी की ओर से आरएसएस पर नए सिरे से हमला यही बताता है कि वे भाजपा से अपनी राजनीतिक लड़ाई न जीत पाने की खीझ में उसके मातृ संगठन पर निशाना साधने में लगे हुए हैं।
वे लगातार यह समझाने का प्रयत्न कर रहे हैं कि भाजपा और आरएसएस संविधान का आदर नहीं करते और वे उसे खत्म करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने यह दुष्प्रचार पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के चार सौ पार के नारे के जवाब में शुरू किया था। यह सही है कि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों को आम चुनाव में इस दुष्प्रचार का चुनावी लाभ मिला, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।
संविधान की प्रति लहराकर कोई बात कहने से वह सच नहीं साबित हो जाती। चूंकि राहुल गांधी तथ्यों और तर्कों के स्थान पर दुष्प्रचार की राजनीति पर अधिक जोर देते हैं, इसीलिए उन्हें वैसी राजनीतिक सफलता नहीं मिल पा रही है, जिसकी वे अपेक्षा कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि वे और अधिक दुष्प्रचार की राजनीति का सहारा लेने लगे हैं।
राहुल गांधी ने संविधान और आरएसएस के बीच की लड़ाई के अपने आरोप को बल देने के लिए अनुसूचित जातियों पर अत्याचार और उनसे भेदभाव के मामलों का उल्लेख किया। ऐसा करते हुए उन्होंने यह संकेत करने की कोशिश की कि ये सारे काम भाजपा और आरएसएस के कारण हो रहे हैं। इससे यही पता चलता है कि वे न तो भाजपा की रीति-नीति से परिचित हैं और न ही आरएसएस की विचारधारा से।
यदि उन्होंने इस संगठन की कार्यप्रणाली को समझने की थोड़ी भी कोशिश की होती तो उन्हें पता चलता कि इसने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बीच जाकर कैसे कार्य किए हैं। इस संगठन के अनेक प्रकल्प तो अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के उत्थान के लिए ही चलाए जा रहे हैं। राहुल गांधी को यह भी पता होना चाहिए कि यदि भाजपा आज राजनीतिक रूप से कहीं अधिक सशक्त हो चुकी है तो इसका कारण समाज के सभी वर्गों और विशेष रूप से अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों तक उसकी पहुंच है।
राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस को अनुसूचित जाति विरोधी साबित करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उत्तराखंड दौरे के बाद उनके मंच के कथित शुद्धीकरण का जो मामला उठाया, वह इस तथ्य की अनदेखी को अधिक बयान करता है कि जिस संगठन ने यह काम किया, उसका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं। स्पष्ट है कि तथ्यों को अपने हिसाब से मोड़ने से बात बनने वाली नहीं है।











