देश में सबसे अधिक बजट वाले नगर निकाय बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी पर प्रभुत्व कायम करने वाली भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने महाराष्ट्र के अन्य अधिकांश निकायों के चुनावों में जीत हासिल कर राष्ट्र का ध्यान इसलिए अपनी ओर खींचा, क्योंकि इन चुनावों को मिनी विधानसभा चुनावों की संज्ञा दी गई थी।

बीएमसी के चुनाव नतीजों पर अधिक ध्यान था, क्योंकि यहां पर ठाकरे परिवार की शिवसेना का 25 वर्षों से कब्जा था। शिवसेना-उद्धव ठाकरे का बीएमसी की सत्ता से बाहर होना एक बड़ा झटका है, क्योंकि इस निकाय का करीब 75 हजार करोड़ रुपये का बजट उसे देश की आर्थिक राजधानी में राजनीतिक शक्ति के साथ आर्थिक ताकत भी प्रदान करता था।

उद्धव ठाकरे ने बीएमसी पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से हाथ मिलाया, लेकिन यह मेल उस पर भारी पड़ा। इसका एक कारण यह रहा कि वह अपनी विचारधारा से भटकती दिखी। कभी भाजपा की स्वाभाविक सहयोगी रही शिवसेना ने पहले धुर विरोधी दलों कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से हाथ मिलाया, फिर निकाय चुनावों में मनसे से हाथ मिला लिया, जो मराठी मानुस के अपने उग्र एजेंडे के कारण उत्तर भारतीयों के प्रति बैर रखने वाली पार्टी है।

इस बार तो राज ठाकरे ने तमिलनाडु भाजपा नेता अन्नामलाई के प्रति अपमानजनक बातें करके उत्तर भारतीयों समेत महाराष्ट्र के बाहर के सभी बाशिंदों को सशंकित कर दिया। यह उद्धव ठाकरे के पराभव का दूसरा कारण रहा। उद्धव यह भूल गए कि अब राज्य के बड़े शहरों में अन्य राज्यों के लोगों की बड़ी संख्या है। मुंबई तो देश भर के लोगों का घर है।

कहना कठिन है कि निकाय चुनावों के निराशाजनक नतीजों के बाद उद्धव ठाकरे मनसे का हाथ छोड़कर फिर से कांग्रेस के साथ खड़े होंगे या नहीं, लेकिन उनके लिए महाराष्ट्र की राजनीति में प्रासंगिक बने रहना किसी चुनौती से कम नहीं। चुनौती कांग्रेस के सामने भी है, क्योंकि निकाय चुनावों में अपेक्षित नतीजे न मिल पाने के कारण राष्ट्रीय दल के रूप में उसकी स्थिति और कमजोर दिखने लगी है।

एक चुनौती शानदार जीत हासिल करने वाली भाजपा के सामने भी है और यह है बीएमसी के कामकाज को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और मुंबई का सही तरीके से विकास करने की। बीएमसी शिवसेना का आर्थिक संबल इसीलिए थी, क्योंकि भ्रष्ट तौर-तरीकों के कारण नगर निकाय का पैसा उसके नेताओं के पास पहुंचता था।

बीएमसी के इसी भ्रष्टाचार के कारण मुंबई अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में विकसित नहीं हो पा रही थी। मुंबई को खराब सड़कों, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से त्रस्त शहर की छवि से मुक्त करना भाजपा की पहली प्राथमिकता बननी चाहिए।