यह अच्छा हुआ कि केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स कंपनियों से दस मिनट में डिलीवरी की व्यवस्था खत्म करने को कहा और ये कंपनियां इसके लिए तैयार भी हो गईं। कुछ कंपनियों ने तो तत्काल प्रभाव से सामान की डिलीवरी दस मिनट में करने के वादे अपने विज्ञापनों से हटा भी लिए। इस जल्दबाजी की कोई आवश्यकता नहीं थी।

कंपनियां आपसी प्रतिस्पर्धा की होड़ में ऐसे वादे करने लगी थीं। इससे काम के बदले भुगतान आधारित तंत्र के तहत सेवाएं देने वाले गिग वर्करों की परेशानी बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा का भी जोखिम बढ़ गया था। हालांकि क्विक कॉमर्स कंपनियों का यह तर्क था कि गिग वर्करों को आम तौर पर तीन किमी के दायरे में ही सामान पहुंचाना होता है, लेकिन अपने देश में ट्रैफिक की स्थिति किसी से छिपी नहीं।

इसके अतिरिक्त कई बार डिलीवरी करने वालों को कॉलोनियों और बहुमंजिला भवनों के सुरक्षा गार्डों की पूछताछ का सामना करना पड़ता था। इसमें समय लगता था। निःसंदेह सरकार के ताजा फैसले से गिग वर्करों को राहत मिलेगी, लेकिन केवल इतना ही पर्याप्त नहीं। सरकार को यह भी देखना होगा कि इन असंगठित कामगारों की कार्यदशाएं बेहतर हों और उन्हें उचित पारिश्रमिक भी मिले।

इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि एक बड़ी संख्या में गिग वर्कर थोड़े समय बाद काम छोड़ देते हैं। इसका कारण लंबी ड्यूटी, प्रतिकूल माहौल और जितने समय काम, उतना ही पैसा जैसे प्रविधान हैं। इसी के चलते पिछले दिनों गिग वर्करों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया था। इसी के बाद वह नया लेबर कोड चर्चा में आया, जिसमें यह कहा गया है कि गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उन्हें कुछ सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

आज जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ ऑनलाइन कारोबार बढ़ रहा है और यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में गिग वर्करों की संख्या में भारी वृद्धि होगी, तब फिर उनके हितों की चिंता करनी ही होगी। यह चिंता सरकार के साथ संबंधित कंपनियों को भी करनी होगी। उनका कारोबार गिग वर्करों के कारण ही बढ़ रहा है और वे मुनाफा भी कमा रही हैं। सच तो यह है कि असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा, बीमा, समय पर समुचित भुगतान आदि के दायरे में लाया जाना चाहिए।

यह तब संभव होगा, जब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उसकी ओर से किए जा रहे उपायों पर सही तरह अमल हो रहा है या नहीं? यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि निजी सुरक्षा गार्डों के हितों की रक्षा को लेकर जो नियम-कानून बनाए गए थे, वे कागजों पर ही अधिक प्रभावी हैं। यह सही समय है कि असंगठित क्षेत्र के हर कामगार की सुध ली जाए। इससे ही श्रमेव जयते का नारा सार्थक होगा।