संपादकीय: पारित हो परिसीमन बिल
मानसून सत्र के बाद, सरकार महिला आरक्षण के लिए परिसीमन विधेयक पारित करने हेतु विशेष सत्र बुला सकती है
HighLights
सरकार महिला आरक्षण हेतु विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही।
परिसीमन विधेयक महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करेगा।
बढ़ती आबादी के लिए उचित संसदीय प्रतिनिधित्व आवश्यक है।
संसद के मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से इसके आसार बने हुए हैं कि सरकार महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक को पारित करने के लिए फिर से एक विशेष सत्र बुला सकती है। इसके आसार इसलिए भी हैं, क्योंकि एक तो सरकार की ओर से इस संदर्भ में लगातार संकेत दिए जा रहे हैं और दूसरी ओर विपक्ष और विशेष रूप से कांग्रेस परिसीमन विधेयक को दोबारा पारित कराए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रही है।
कहना कठिन है कि आने वाले दिनों में ऐसा होगा या नहीं और सरकार परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए सितंबर में संसद का विशेष सत्र बुलाएगी या नहीं, लेकिन यदि राजनीतिक दल अगले लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण पर अमल होते हुए देखना चाहते हैं तो उन्हें परिसीमन विधेयक पर सहमति बनानी ही होगी। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो आधी आबादी से किया गया यह वादा झूठा ही साबित होगा कि महिलाओं को विधानमंडलों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा।
महिला आरक्षण से संबंधित परिसीमन विधेयक को केवल इसलिए हरी झंडी नहीं दिखाई जानी चाहिए, क्योंकि इसके लिए संसद सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त कर चुकी है, बल्कि इसलिए भी ऐसा किया जाना चाहिए, क्योंकि बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए लोकसभा सदस्यों की ओर से लोगों का समुचित प्रतिनिधित्व करना भी आवश्यक है।
वर्तमान में लोकसभा सदस्य औसतन 22 लाख आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक अकेले संसद सदस्य का इतनी बड़ी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व कर पाना और उसके हितों की चिंता कर पाना बहुत कठिन है। ऐसे में यह आवश्यक है कि परिसीमन विधेयक को मंजूरी देकर महिला आरक्षण का रास्ता साफ किया जाए और लोगों को संसद में समुचित प्रतिनिधित्व भी दिया जाए।
ऐसा करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि पिछले लगभग 50 वर्षों से जनसंख्या में वृद्धि के बावजूद लोकसभा सीटों की संख्या यथावत है। इन सीटों की संख्या रोके रखना और मौजूदा 543 सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग करना एक तरह से संवैधानिक आवश्यकता की जानबूझकर अनदेखी ही है। सरकार ने परिसीमन विधेयक पर सहमति बनाने के लिए सभी राज्यों में लोकसभा की 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का जो प्रस्ताव रखा है, वह एक उचित प्रस्ताव है।
इससे किसी भी राज्य के राजनीतिक हितों की उपेक्षा नहीं होगी। यदि विपक्षी दल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते और परिसीमन विधेयक पर अड़ंगा लगाए रखते हैं तो फिर जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से उन राज्यों का अहित ही होगा, जो अपने यहां जनसंख्या वृद्धि दर में कमी के चलते लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम होने की आशंका से ग्रस्त हैं, क्योंकि तब लोकसभा सीटों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में बढ़ेंगी।












