नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर की जो तस्वीर प्रस्तुत की, उस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। इस रिपोर्ट में नीति आयोग ने कमजोर व्यावहारिक सीख, सतही इंटर्नशिप एवं अप्रेंटिसशिप के साथ-साथ करियर गाइडेंस की कमी को जिस तरह प्रमुख चुनौतियों में गिना, उससे यह स्पष्ट है कि कौशल विकास के जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और जिनमें अच्छी-खासी धनराशि भी खर्च की जा रही है, वे उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कौशल विकास के कार्यक्रमों में युवा कुछ सीखने के स्थान पर कामचलाऊ प्रशिक्षण पा रहे और केवल प्रमाण पत्र हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं?

यह सही समय है कि इन कार्यक्रमों के संचालन में आइआइटी और आइआइएम जैसे संस्थानों का सहयोग लिया जाए। इन कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाते समय कारोबार जगत को भी साथ लेना चाहिए, ताकि यह जाना जा सके कि उसे कैसे कौशल से लैस युवाओं की आवश्यकता है। ध्यान रहे कारोबार जगत यह शिकायत करता रहता है कि उसे जैसे कुशल युवा चाहिए, वैसे नहीं मिल पा रहे हैं। निःसंदेह यह भी चिंताजनक है कि नीति आयोग की रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था की खामियां भी बयान कर रही है। यह ठीक नहीं कि उच्च शिक्षा पाने वाले 80 प्रतिशत छात्रों ने प्रैक्टिकल अनुभव की कमी को बड़ी समस्या बताया। शायद इसी कारण केवल 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट ही ऐसे काम में हैं, जो उनकी शिक्षा स्तर के अनुरूप है।

आज जब सामान्य बीए, बीकाम और बीएससी की डिग्रियां रोजगार पाने में सहायक नहीं बन पा रही हैं, तब फिर डिग्रीधारकों को किसी ऐसे कौशल से लैस किया ही जाना चाहिए, जो उन्हें रोजगार दिला सके। विडंबना यह है कि बड़ी संख्या में छात्र सामान्य डिग्रियां हासिल करते हैं और फिर वे सरकारी नौकरियों की तलाश करने लगते हैं। आज जब हर क्षेत्र में कौशल की मांग है, तब बीए, बीकाम, बीएससी आदि की पहले जैसी पढ़ाई का क्या औचित्य?

देश को केवल डिग्रीधारी युवाओं की जरूरत नहीं, बल्कि डिग्री संग किसी कौशल से लैस युवाओं की आवश्यकता है। आज की पीढ़ी को यह संदेश देना होगा कि उन्हें ऐसे किसी कौशल से लैस होना होगा, जिसकी बाजार में मांग हो। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो युवा डिग्री तो हासिल कर लेंगे, लेकिन उन्हें नौकरी पाने में कठिनाई होगी। वर्तमान में डिग्री हासिल कर लेने और नौकरी के लिए सक्षम होने में स्पष्ट अंतर स्थापित हो गया है। इस अंतर को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के लिए नीति आयोग के इस सुझाव पर यथाशीघ्र अमल किया जाए कि स्कूल से लेकर कालेज स्तर तक रोजगार और उद्यमिता से जुड़े कौशल की सीख दी जाए।