जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
HighLights
अमेरिका ने वीजा आवेदनों पर मनमाने ढंग से रोक लगाई।
भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर इसका गहरा असर।
डॉलर का हथियार के रूप में उपयोग कर रहा अमेरिका।
अमेरिका ने दुनिया भर में वीजा आवेदनों पर रोक लगाकर न केवल अप्रत्याशित फैसला लिया, बल्कि अपने मनमानेपन का भी परिचय दिया। वीजा आवेदन रोकने का फैसला घरेलू सुरक्षा को मजबूत करने के बहाने लिया गया है, लेकिन इसकी आड़ में अमेरिका अपनी वीजा नीति में ऐसे बदलाव कर सकता है, ताकि लोगों को अमेरिका आने से रोका जा सके। इससे आगे चलकर उसे ही नुकसान हो सकता है, क्योंकि दुनिया भर के प्रतिभाशाली लोग वहां पहुंचते हैं और उसकी समृद्धि में सहायक बनते हैं।
इनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी होते हैं। अमेरिकी प्रशासन के नवीनतम फैसले से भारतीयों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल में वीजा फीस बढ़ाने के साथ उससे संबंधित नीतियों में ऐसे बदलाव किए हैं, जिनका बुरा असर खास तौर पर भारतीयों पर पड़ा है। एक समाचार के अनुसार अमेरिका के कालेजों में एडमिशन के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत घटी है। अमेरिका केवल इसके ही प्रबंध नहीं कर रहा है कि दूसरे देशों से कम से कम लोग आएं, बल्कि वह अपने यहां पढ़ाई और नौकरी कर रहे लोगों के समक्ष भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है। यह एक तथ्य है कि ट्रंप मित्र एवं सहयोगी देशों के लिए खास तौर पर परेशानी खड़ी कर रहे हैं। उनकी मनमानी टैरिफ नीति से सबसे अधिक प्रभावित देशों में अमेरिका के मित्र और सहयोगी देश ही हैं, जैसे कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान, भारत आदि।
उन्होंने अपनी मनमानी विदेश नीति से भी यूरोप समेत अन्य मित्र देशों को तंग कर रखा है। गत दिवस अमेरिका ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की जो घोषणा की, उससे प्रभावित होने वाले देशों में भारत भी है। अमेरिका हर मामले में मनमानी इसीलिए कर पा रहा है, क्योंकि डालर वैश्विक मुद्रा बनी हुई है। चूंकि अन्य मुद्राओं की तुलना में डालर कहीं अधिक मजबूत है, इसलिए अमेरिका उसका इस्तेमाल हथियार की तरह करने में लगा हुआ है।
विश्व को यह समझना होगा कि अमेरिका डालर पर उसकी निर्भरता का बेजा लाभ उठा रहा है। चूंकि अमेरिका हर उस देश को छल-बल से निशाना बनाता है जो डालर के बजाय अन्य किसी मुद्रा में व्यापार करने की कोशिश करता है, इसलिए उसकी चौधराहट को चुनौती देने के लिए प्रमुख राष्ट्रों को एकजुट होना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो अमेरिका संयुक्त राष्ट्र को धता बताकर अपनी मनमानी करता ही रहेगा।












