जागरण संपादकीय: संकट का सामना
ध्यान रहे कि किसी भी संकट का समाधान तभी आसान होता है जब शासन-प्रशासन के साथ आम जनता भी उसका सामना इस भाव से करती है कि कैसी भी चुनौती हो, उससे पार पा लिया जाएगा।
HighLights
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया युद्ध पर ऊर्जा आपूर्ति की समीक्षा की।
पेट्रोल, डीजल, गैस, उर्वरक आपूर्ति निर्बाध रखने पर जोर दिया।
राज्य सरकारों को कालाबाजारी रोकने हेतु सक्रिय होना होगा।
पश्चिम एशिया में लंबे खिंचते युद्ध को देखते हुए प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों के साथ आपात बैठक कर देश भर में ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध ढंग से जारी रखने की तैयारियों को लेकर जो चर्चा की, वह समय की मांग थी। इस बैठक में पेट्रोल-डीजल और गैस के साथ ही उर्वरकों की आपूर्ति सुगम बनाए रखने के जिन उपायों पर मंथन किया गया, उनके निष्कर्षों से राज्य सरकारों को भी अवगत कराने की आवश्यकता होगी और उन्हें कुछ निर्देश देने की भी। जिस तरह केंद्र सरकार संकट से पार पाने के लिए कमर कसती दिख रही है, उसी तरह राज्य सरकारों को भी सक्रियता दिखानी होगी।
उचित यह होगा कि प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ भी इस उद्देश्य से चर्चा करें कि हर स्तर पर यह संदेश पहुंचे कि देश में कहीं पर भी ऊर्जा एवं उर्वरक संकट पैदा नहीं होने दिया जाएगा। नि:संदेह मौजूदा स्थिति की तुलना कोविड काल से नहीं की जा सकती, लेकिन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने और उनकी कालाबाजारी एवं जमाखोरी न होने देने पर निगाह रखने की जरूरत तो बढ़ ही गई है। केंद्र और राज्य सरकारों को केवल यही नहीं देखना कि ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति सुगमता से होती रहे, बल्कि इस पर भी ध्यान देना होगा कि अर्थव्यवस्था के पहिए गतिमान बने रहें। इसके लिए ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर आवश्यक उपाय करना जरूरी है।
चूंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है और इसके कोई आसार नहीं दिख रहे कि यह सैन्य टकराव कब और कैसे खत्म होगा, इसलिए पश्चिम एशियाई देशों से तेल एवं गैस की आपूर्ति का संकट और गहरा सकता है। इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल एवं गैस के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं। इसके नतीजे में भारत सरकार को भी उनकी कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे देश में कुछ न कुछ महंगाई भी बढ़ सकती है। ध्यान रहे पश्चिमी देशों के लिए हवाई यात्रा पहले ही महंगी हो गई।
आशा की जानी चाहिए कि कीमतें बढ़ाने की नौबत न आने पाए, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार भी रहा जाना चाहिए। यह तैयारी केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों एवं जिला प्रशासन के स्तर पर भी होनी चाहिए। इसी के साथ आम जनता को यह समझना होगा कि जो संकट पैदा हुआ है, उसमें भारत सरकार की कहीं कोई भूमिका नहीं। ऐसे में यदि कहीं किसी तरह की कठिनाई पैदा हो तो आम लोगों को संयम का परिचय देना होगा। ध्यान रहे कि किसी भी संकट का समाधान तभी आसान होता है जब शासन-प्रशासन के साथ आम जनता भी उसका सामना इस भाव से करती है कि कैसी भी चुनौती हो, उससे पार पा लिया जाएगा।












