संपादकीय: घुसपैठियों के मददगार
ईडी की छापेमारी से बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को देश में बसाने वाले एक सुनियोजित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह FCRA फंड का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान पत्र और आजीविका प्रदान कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा था।
HighLights
ईडी ने घुसपैठियों को बसाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया।
गिरोह FCRA फंड का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान पत्र दे रहा था।
बंगाल में मदरसे से 40 लाख रुपये और सोना बरामद हुआ।
इसकी आशंका बहुत पहले से थी कि कुछ गिरोह सुनियोजित तरीके से बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को अवैध तरीके से देश में लाने और बसाने का काम कर रहे हैं। गत दिवस प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा में कई स्थानों पर छापेमारी करने और घुसपैठ में लिप्त गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करने से यह आशंका सच सिद्ध होती दिख रही है।
इस गिरोह के खिलाफ ईडी ने कार्रवाई इसलिए की, क्योंकि वे विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत स्वयं को मिलने वाले पैसे का दुरुपयोग कर रहे थे। वे इस पैसे के जरिये घुसपैठियों को देश में लाकर उन्हें फर्जी पहचान पत्रों से लैस करने के साथ उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाने और उनकी आजीविका का प्रबंध करते थे।
वे आर्थिक रूप से कितने समर्थ थे, इसे इससे समझा जा सकता है कि उनकी ओर से घुसपैठियों को ई रिक्शा तक दिए जाते थे। स्पष्ट है कि उन्हें बड़ी मात्रा में विदेश से चंदा मिलता था। इसकी पुष्टि इससे भी होती है कि ईडी ने बंगाल के एक मदरसे से 40 लाख रुपये और 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद बरामद किए।
ईडी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश के आंतकवाद निरोधक दस्ते की उस प्राथमिकी के तहत हो रही है, जिसमें घुसपैठियों की सहायता करने वाले एक जटिल वित्तीय नेटवर्क का उल्लेख किया गया था। चूंकि इस नेटवर्क में कई तथाकथित कल्याणकारी संस्थाएं शामिल हैं, इसलिए उन सबको न केवल बेनकाब किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें कठोर दंड का भागीदार भी बनाया जाना चाहिए। यह सही समय है कि घुसपैठियों के मददगार अन्य तत्वों के खिलाफ बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों के साथ-साथ देश के सभी राज्यों की पुलिस एवं अन्य एजेंसियां भी सक्रिय हों।
इसकी आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के करीब-करीब हर राज्य में नजर आते हैं। इन घुसपैठियों ने बंगाल के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राज्यों से घुसपैठ करके जिस तरह दिल्ली, जम्मू, हैदराबाद, सूरत आदि में अपने ठिकाने बना लिए, उससे यही पता चलता है कि उन्हें किसी साजिश के तहत सुनियोजित तरीके से लाकर देश भर में बसाया जा रहा है। चिंता की बात यह है कि उनके हमदर्द भी पैदा हो गए हैं। वे उन्हें देश में रहने देने की वकालत कर रहे हैं।
वास्तव में ऐसे ही लोग विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के नियमों में किए गए संशोधन का विरोध कर रहे हैं। यह समझा जाना चाहिए कि घुसपैठियों की बढ़ती संख्या देश के संसाधनों पर बोझ बनने के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी बन रही है। यह एक तथ्य है कि बड़ी संख्या में घुसपैठिए फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे मतदाता यानी भारतीय नागरिक बन गए हैं।












