जागरण संपादकीय: दिल्ली दंगे के दोषी
यह भी आवश्यक है कि इन दंगों से जुड़े अन्य मामलों का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए, ताकि दोषियों और उनके हितैषियों को सख्त संदेश दिया जा सके।
HighLights
ताहिर हुसैन अंकित शर्मा हत्या मामले में दोषी करार।
राजनीतिक संरक्षण और बचाव करने वालों की पोल खुली।
दिल्ली दंगों के अन्य मामलों का शीघ्र निपटारा हो।
वर्ष 2020 में दिल्ली में हुए भीषण दंगों के एक बड़े मामले में आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन और चार अन्य को इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया जाना यह भी बताता है कि इस दंगे में नेता भी शामिल थे। यह पहले ही प्रमाणित हो चुका है कि ताहिर हुसैन जैसे नेताओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। यह एक तथ्य है कि अंकित शर्मा की हत्या में उसका नाम आने पर आम आदमी पार्टी समेत अन्य दलों के नेताओं ने उसका बचाव किया था।
उसका बचाव करने वालों में कई अन्य जाने-माने लोग भी थे। ताहिर हुसैन को दोषी करार दिए जाने से इन सबकी पोल खुल गई है। इन लोगों को बताना चाहिए कि वे किस आधार पर ताहिर हुसैन को निर्दोष होने का प्रमाण पत्र दे रहे थे, क्योंकि उसे दोषी करार देने वाली अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि फैसला ठोस साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है। यह एक विडंबना ही है कि कुछ नेता अभी भी ताहिर हुसैन के लिए आंसू बहा रहे हैं।
इसे भी विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने उसे चुनाव मैदान में उतारा था। यह भी नहीं भूला जाए कि दिल्ली दंगे उस नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने की आड़ में हुए थे, जिस पर जब अमल किया गया तो विरोध की कोई आवाज नहीं उठी। उन सब नेताओं को शर्मिंदा होना चाहिए, जिन्होंने इस कानून को लेकर देश को गुमराह किया और जिसके चलते दिल्ली में भीषण हिंसा हुई।
दिल्ली दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए थे और यह तब भड़का था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा पर थे। इस नतीजे पर पहुंचने के अच्छे-भले कारण हैं कि दिल्ली में ट्रंप की उपस्थिति में दंगा करने की साजिश इसलिए भी रची गई थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को मलिन किया जा सके। उचित यह होगा कि ताहिर हुसैन समेत अंकित शर्मा के अन्य हत्यारों को कठोर दंड का भागीदार बनाने के साथ ही उन लोगों को भी बेनकाब किया जाए, जिन्होंने देश को बदनाम करने के लिए राजधानी को दंगों की आग में झोंका।
यह भी आवश्यक है कि इन दंगों से जुड़े अन्य मामलों का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए, ताकि दोषियों और उनके हितैषियों को सख्त संदेश दिया जा सके। दिल्ली दंगों से जुड़े अभी कई संगीन मामलों का निपटारा होना शेष है। ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय देने की कोई व्यवस्था बननी चाहिए, क्योंकि इससे ही दोषियों को सही सबक मिलता है। इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि दिल्ली दंगों के एक बड़े मामले में फैसला सुना दिया गया, क्योंकि यह कहना कठिन है कि उच्चतर अदालतों की ओर से अपने हिस्से का कार्य निष्पादन कब किया जाएगा?












