जागरण संपादकीय: रंग और उमंग का उत्सव
मन में उल्लास का भाव उमड़ते ही होली की उमंग तन-मन को प्रफुल्लित कर देती है। होली सबको संकोच त्यागकर आनंद और उमंग में सराबोर होने का आमंत्रण देती है। इस आमंत्रण को हंसी-ठिठोली, रंग-गुलाल के साथ सभी सहर्ष स्वीकार करें, इस अपेक्षा के साथ होली की रंगारंग शुभकामनाएं।
HighLights
भारत प्राचीन और समृद्ध संस्कृति में पगा पर्वों का भी देश है। प्रकृति में परिवर्तन की झलक मिलने के साथ ही हम भारतीय किसी न किसी उत्सव की प्रतीक्षा करते दिखते हैं। यह प्रतीक्षा इसलिए रहती है, क्योंकि अलग-अलग अवसरों पर भिन्न-भिन्न तरीके से मनाए जाने वाले पर्व एक ओर जहां हमें अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से परिचित कराते हैं, वहीं जीवन की एकरसता को भी तोड़ते हैं।
वैसे तो यह काम सभी त्योहार करते हैं, लेकिन जिस अनूठे तरीके से होली करती है, उसका कोई जोड़ नहीं और इसी कारण यह उत्सव सबसे अलग ढंग से लोगों को आनंदित एवं उल्लासित करता है। केवल उल्लास और आनंद ही होली का प्रधान तत्व नहीं है, इसी के साथ यह सबको अपनत्व के रंगों से सराबोर करने वाला भी त्योहार है।
इस अवसर पर ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, अपने-पराए का भेद तो मिटता ही है, खुद खुश होने और औरों को खुशियां देने का भाव भी जगता है। यह मतभेद भी मिटाता है और मनभेद भी। यह मनुष्य का स्वभाव है कि उसकी प्रसन्नता तब और बढ़ती है, जब वह दूसरों को प्रसन्न करने का अवसर प्राप्त करता है। होली यह अवसर सबको सहज रूप से प्रदान करती है।
होली यह रेखांकित करती है कि यदि जीवन में आनंद का संचार करना है तो एकरसता को तोड़ना ही होगा। एक दिन के लिए ही सही, एकरसता की टूटन जीवन की यांत्रिकता और उसकी कृत्रिमता को भंग करती है और उसमें उमंग भरती है, जो मनुष्य को एक नई ऊर्जा प्रदान करती है।
होली केवल एक-दूसरे को गले लगाने का ही नहीं, बल्कि मन का मैल मिटाने का त्योहार है। वैसे तो होली रंगों का त्योहार है, लेकिन इन रंगों में नाना प्रकार की पंरपराओं की छटा भी देखने को मिलती है। होली पर देश भर में एक जैसा रंग, अबीर-गुलाल उड़ता है और इस अवसर पर कुछ सदा सुनाई देने वाले गीत हर जगह गूंजते हैं, लेकिन इसी के साथ लगभग हर प्रांत में खान-पान, रीति-रिवाजों, गायन-वादन की भिन्नता भी देखने को मिलती है।
यह यही बताती है कि भारत के कोने-कोने में होली के रूप भले भिन्न हों, पर भाव एक है। यह भाव यही संदेश देता है कि भारत किस तरह एकता में अनेकता को समाहित करने वाला अद्भुत देश है। यह भारत की विशिष्टता भी है और उसकी शक्ति भी। इसे बनाए रखना है और समृद्ध भी करना है। होली मनाने के लिए न तो धन की आवश्यकता है और न ही किसी तरह के वैभव के प्रदर्शन की।
मन में उल्लास का भाव उमड़ते ही होली की उमंग तन-मन को प्रफुल्लित कर देती है। होली सबको संकोच त्यागकर आनंद और उमंग में सराबोर होने का आमंत्रण देती है। इस आमंत्रण को हंसी-ठिठोली, रंग-गुलाल के साथ सभी सहर्ष स्वीकार करें, इस अपेक्षा के साथ होली की रंगारंग शुभकामनाएं।












