संपादकीय: एक नई जंग, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। लेबनान के हिजबुल्ला और यमन के हाउती भी इसमें शामिल हो गए हैं।
HighLights
अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया, ईरान का पलटवार।
हिजबुल्ला, हाउती शामिल, पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ी।
भारत के लिए चुनौती: तेल, नागरिकों की सुरक्षा का संकट।
अमेरिका जिस तरह बीते कुछ दिनों से ईरान को चेतावनी देने के साथ ही उसकी घेरेबंदी कर रहा था, उससे ऐसा लगता था कि उसका उद्देश्य उससे वार्ता कर उसे इसके लिए बाध्य करना भर है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम का परित्याग कर दे, लेकिन उससे बातचीत के बीच ही उसने इजरायल संग उस पर हमला बोल दिया। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के साथ ही पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
उसका साथ देने के लिए लेबनान के हिजबुल्ला और यमन के हाउती भी आगे आ गए हैं। इसका परिणाम ईरान पर इजरायल एवं अमेरिका के हमले और तेज होने के रूप में ही सामने आएगा। इससे आपसी मतभेदों के दौर से गुजर रहे अरब जगत के साथ-साथ पश्चिम एशिया और अस्थिर तो होगा ही, तेल के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही विश्व शांति के लिए और गहरा संकट पैदा हो सकता है।
इसलिए और भी, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी जनता से अपनी सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील करते हुए कहा है कि लक्ष्य पूरा होने तक अमेरिका रुकेगा नहीं। ट्रंप का लक्ष्य केवल ईरान के परमाणु हथियार बनाने वाले तंत्र को ध्वस्त करना ही नहीं, बल्कि वहां सत्ता परिवर्तन करना भी है। इसीलिए ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के आवास पर भी हमले किए गए। यह जंग ऐसे समय शुरू हुई है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध चार साल बाद भी जारी है और पिछले दिनों अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में भी युद्ध छिड़ गया।
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य संघर्ष कहीं अधिक व्यापक असर वाला हो सकता है। इससे भारत भी प्रभावित होगा। उसके समक्ष न केवल पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में रह रहे लाखों भारतीयों को निकालने की चुनौती पैदा हो सकती है, बल्कि महंगे कच्चे तेल की खरीदारी की बाध्यता भी। यह भी तय है कि इस जंग में वह किसी भी पक्ष के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहेगा।












